उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एसआईआर के दौरान उम्र व नाम की विसंगतियों पर 2.34 लाख मतदाताओं को नोटिस। दस्तावेज जांच के बाद सूची में संशोधन का काम चल रहा है।
रायबरेलीः उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची की जांच में चैंकाने वाले मामले सामने आए हैं। इनको देखकर प्रशासन भी हैरान है। इन मामलों में कहीं पिता-पुत्र की उम्र में 50 साल से ज्यादा या 15 साल से कम का अंतर दर्ज है, तो कहीं बाबा और पोते की उम्र में 40 साल से भी कम का फर्क मिला है। इन तार्किक विसंगतियों के आधार पर 2.34 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
नो-मैपिंग और उम्र संबंधी गड़बड़ियां
जिले में पहले चरण में 2.32 लाख से अधिक ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए थे, जिनकी एंट्री में ‘नो मैपिंग’ की स्थिति थी। इन पर सुनवाई की प्रक्रिया पहले से जारी है। अब दूसरे चरण में 2.34 लाख और मतदाताओं को चिन्हित किया गया है, जिनके नाम की स्पेलिंग, माता-पिता के विवरण और उम्र में असंगतियां पाई गई हैं।
प्रशासन ने इन्हें ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में रखते हुए नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। संबंधित मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद ही सूची में नाम जोड़ने या संशोधित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
सुनवाई के लिए अतिरिक्त व्यवस्था
विधानसभा क्षेत्रों में बढ़ती संख्या को देखते हुए अतिरिक्त एईआरओ तैनात किए गए हैं। जिला निर्वाचन विभाग ने बीएलओ की मदद के लिए 2451 अतिरिक्त कर्मियों की ड्यूटी लगाई है, ताकि जांच और सुनवाई समय से पूरी हो सके।
फिलहाल पुराने नोटिसों पर ही सुनवाई का काम चल रहा है और कई मतदाताओं को जरूरी दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो रही है। नए नोटिस जारी होने से अधिकारियों पर भी काम का दबाव बढ़ गया है।
एक माह बढ़ी दावे-आपत्तियों की अवधि
राज्य निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा एक माह बढ़ा दी है, जिससे मतदाताओं को राहत मिली है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी सिद्धार्थ ने बताया कि कई मामलों में पिता-पुत्र और अन्य पारिवारिक संबंधों की उम्र में असामान्य अंतर सामने आया है। ऐसे मामलों में नोटिस जारी कर दस्तावेजों की जांच की जाएगी। सत्यापन के बाद ही मतदाता सूची में नाम सही रूप में दर्ज किया जाएगा।