Breaking News
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश > ग्वालियर

नकल रोकने की उड़नदस्ता टीम पर उठ रहे सवाल: जहां सबसे ज्यादा शिकायतें, उड़नदस्ते में भी वहीं के

नकल रोकने की उड़नदस्ता टीम पर उठ रहे सवाल: जहां सबसे ज्यादा शिकायतें, उड़नदस्ते में भी वहीं के शिक्षक

नकल रोकने की उड़नदस्ता टीम पर उठ रहे सवाल जहां सबसे ज्यादा शिकायतें उड़नदस्ते में भी वहीं के शिक्षक

जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध भिंड और मुरैना जिले के महाविद्यालयों में सबसे ज्यादा नकल के मामले सामने आते हैं। इन जिलों में सामूहिक नकल की शिकायतें भी मिलती हैं। नकल को रोकने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा जो उड़नदस्ता बनाया जाता है, उसके लिए अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा द्वारा जिन शिक्षकों की सूची भेजी गई है, उनमें ज्यादातर भिंड-मुरैना में पदस्थ शिक्षक ही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब यह शिक्षक अपने जिलों में तैनात रहकर नकल रोक नहीं पा रहे, तो उड़नदस्ते में वे नकल कैसे रोकेंगे?

उड़नदस्ता में ज्यादातर भिंड-मुरैना के शिक्षक

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षाओं के दौरान निगरानी के लिए अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, ग्वालियर-चंबल संभाग कुमार रत्नम से एक प्रभारी उड़नदस्ते के गठन के लिए नाम मांगे थे। उद्देश्य था पारदर्शी और निष्पक्ष निगरानी। लेकिन जो सूची सामने आई, वह चौंकाने वाली है। दस सदस्यों की विश्वविद्यालय उड़नदस्ता टीम में से आठ सदस्य भिंड और मुरैना जिले से ही रखे गए हैं। यानी, जिन जिलों से सबसे ज्यादा नकल और फर्जीवाड़े की शिकायतें आती रही हैं, वहीं के अधिकारियों और कर्मचारियों को निगरानी की कमान सौंप दी गई। इसे क्या कहा जाए-व्यवस्था की विडंबना या खुला विरोधाभास?

सामूहिक नकल के वीडियो तक हो रहे बहुप्रसारित

परीक्षाओं में नकल के मामलों में सबसे आगे रहा है भिंड जिला, जहां बीते वर्षों में कई सामूहिक नकल के मामले सामने आए हैं। इनमें से कई मामले ऐसे भी थे, जिनमें परीक्षार्थियों की सामूहिक नकल के वीडियो तक बहुप्रसारित हुए। इसके अलावा, ठेके पर डिग्री करवाने वाले और नकल पर परीक्षा करवाने पर आधारित कई कॉलेज लंबे समय से भिंड और मुरैना जिले में संचालित हो रहे हैं।

कमेटी में शामिल सदस्य

डॉ. मनोज राणा, एमजेएस कॉलेज, भिंड

डॉ. हरेंद्र सिकरवार, शा. कन्या महाविद्यालय, मुरैना

डॉ. त्रिलोक सिंह चाहरे, झलकारी बाई कन्या महाविद्यालय, ग्वालियर

डॉ. संजीव सिंह, शा. महाविद्यालय, बानमोर, मुरैना

डॉ. दिवाकर पाल, शा. महाविद्यालय, रिठौराकलां, मुरैना

सुदीप सिंह यादव, शा. महाविद्यालय, कैलारस, मुरैना

नीरज सिंह गुर्जर, शा. पीजी कॉलेज, मुरैना

डॉ. अनुराग पथक, शा. महाविद्यालय, पिछोर, ग्वालियर

डॉ. भावना बघेल, शा. विधि महाविद्यालय, मुरैना

डॉ. ग्रेस सिंह, शा. महाविद्यालय, मेहगांव, भिंड

इनका कहना है

प्रो. के. रत्नम, अतिरिक्त संचालक, जीवाजी विश्वविद्यालय ने कहा कि उड़नदस्ते के लिए शिक्षकों के नाम उपलब्धता के आधार पर भेज दिए गए हैं। इसके बाद, इनसे किस क्षेत्र के कॉलेजों का निरीक्षण करवाना है, यह जीवाजी विश्वविद्यालय प्रबंधन ही तय करेगा।

उच्च शिक्षा ग्वालियर-चंबल संभाग के कुलसचिव राजीव मिश्रा ने कहा कि भिंड-मुरैना के जिन शिक्षकों के नाम भेजे गए हैं, उन्हें उन महाविद्यालयों में नहीं भेजा जाएगा, जिनमें वे मूल रूप से पदस्थ हैं।

Related to this topic: