Breaking News
  • भारत की लगातार दूसरी जीत, इटली पहली बार जीता, श्रीलंका 105 रन से नेपाल को हराया
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

पोषण ट्रैकर ऐप से बच्चों की सेहत पर पैनी नजर, आंकड़ों के आधार पर बनेगी हर क्षेत्र की पोषण योजना

पोषण ट्रैकर ऐप से बच्चों की सेहत पर पैनी नजर, आंकड़ों के आधार पर बनेगी हर क्षेत्र की पोषण योजना

पोषण ट्रैकर ऐप से बच्चों की सेहत पर पैनी नजर आंकड़ों के आधार पर बनेगी हर क्षेत्र की पोषण योजना

Poshan Tracker App: महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों की ऊंचाई, वजन और उम्र के अनुसार उनकी पोषण स्थिति का रिकॉर्ड पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए लगातार तैयार किया जा रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर यह देखा जा रहा है कि किस क्षेत्र में किस तरह की पोषण समस्या है। इसके अनुसार ही वहां के लिए जल्दी और जरूरत के हिसाब से योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार किया जा सके।

पोषण ट्रैकर की सफलता के लिए जरूरी है सही इस्तेमाल

मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप केवल बच्चों की लंबाई और वजन ही नहीं बताता बल्कि यह कुपोषण, कम वजन और हड्डियों में कमजोरी जैसी समस्याओं की पहचान में भी मदद करता है। इसकी सफलता तभी संभव है जब फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी इसे सही तरीके से इस्तेमाल करें। इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और सुपरवाइजरों को तकनीकी प्रशिक्षण देना जरूरी है। साथ ही अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि इस योजना का लाभ पूरी तरह से बच्चों तक पहुंच सके।

नवाचार और निगरानी से मिलेगा बेहतर परिणाम

मंत्री भूरिया ने कहा कि निरंतर मॉनिटरिंग से गलतियों को समय पर पकड़ा जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि झाबुआ जिले में 'मोटी आई' जैसे नए प्रयोग से कुपोषण में अच्छी कमी देखी गई है। ऐसे ही हर जिले में अधिकारियों को नवाचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का पूरा रिकॉर्ड रखें, समय-समय पर उनकी निगरानी करेंऔर जो बच्चे ज्यादा कमजोर हैं, उन्हें तुरंत चिकित्सीय मदद उपलब्ध कराएं, ताकि उनका सही विकास हो सके।