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पीएम मोदी 4 जून को करेंगे मंत्रिपरिषद की बैठक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली मीटिंग

पीएम मोदी 4 जून को करेंगे मंत्रिपरिषद की बैठक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली मीटिंग

पीएम मोदी 4 जून को करेंगे मंत्रिपरिषद की बैठक ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली मीटिंग

PM Modi Council of Ministers Meeting : नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 जून को एक महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं। यह बैठक ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर भारत के साहसिक हमले के बाद होने वाली पहली उच्च स्तरीय चर्चा होगी। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ऑपरेशन सिंदूर पर एक विस्तृत प्रस्तुति दे सकते हैं, जो हाल के दशकों में भारत के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।

आतंकवाद के खिलाफ भारत का कदम

7 मई की सुबह शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ढांचों को पूरी तरह नष्ट करना था। इस अभियान ने न केवल आतंकियों के ठिकानों को तबाह किया, बल्कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और स्पष्ट संदेश भी दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने बार-बार जोर देकर कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ एक “नई लाल रेखा” खींच दी है। यह अभियान भारत की नीति में एक “नई सामान्यता” स्थापित करता है, जिसमें सीमा पार आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पहलगाम हमले का जवाब

पहलगाम हमले के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए जवाबी हमलों की जानकारी दी। उन्होंने इसे “राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण” करार दिया। इसके अलावा, कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। इनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना, अटारी में एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) को बंद करना, सीमा पार व्यापार पर रोक लगाना और पाकिस्तानी उड़ानों पर प्रतिबंध जैसे कदम शामिल हैं। ये सभी निर्णय आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को दर्शाते हैं।

वैश्विक मंच पर भारत का संदेश

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, भारत सरकार ने वैश्विक समुदाय को अपने रुख से अवगत कराने के लिए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विश्व के विभिन्न हिस्सों में भेजे। इन प्रतिनिधिमंडलों ने ऑपरेशन सिंदूर और भारत के आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण को स्पष्ट किया।

पिछले सप्ताह, प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि आतंकवादियों की प्रॉक्सी वॉर अब नहीं चलेगी। उन्होंने कहा, “गोलियों का जवाब अब तोप के गोले से दिया जाएगा।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास में सबसे बड़ा और सबसे सफल आतंकवाद विरोधी अभियान करार दिया, जो साहस और वीरता का प्रतीक बन चुका है।

ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा। यह अभियान भारत की रक्षा नीति में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। 4 जून की बैठक में इस अभियान के परिणामों, भविष्य की रणनीतियों और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।

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