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निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंजूर, SC कहा - AG के समक्ष मामला दर्ज करें

निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंजूर, SC कहा - AG के समक्ष मामला दर्ज करें

निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंजूर sc कहा - ag के समक्ष मामला दर्ज करें

नई दिल्ली। निशिकांत दुबे के खिलाफ मामला दर्ज करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 21 अप्रैल को मंजूरी दे दी है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा कि, एजी (अटॉर्नी जनरल) के समक्ष मामला दर्ज करें। वह अनुमति देंगे।

याचिकाकर्ता ने निशिकांत दुबे मामले का उल्लेख किया जिसमें सीजेआई संजीव खन्ना के खिलाफ टिप्पणी की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि, कल इंडियन एक्सप्रेस में कुछ लेख छपा था, जिसमें सीजेआई के खिलाफ निशिकांत दुबे ने बयान दिया था। मैं अवमानना ​​का मामला दर्ज करना चाहता हूं।

न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 के अनुसार, कोई भी निजी व्यक्ति अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति प्राप्त करने के बाद ही सर्वोच्च न्यायालय में न्यायालय की अवमानना ​​याचिका दायर कर सकता है।

निशिकांत दुबे ने पिछले सप्ताह समाचार वायर एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि सीजेआई खन्ना "देश में सभी गृहयुद्धों" के लिए जिम्मेदार हैं। उनकी टिप्पणियों के बाद कुछ वकीलों ने एजी को पत्र लिखकर दुबे के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम के तहत न्यायालय की अवमानना ​​याचिका दायर करने की अनुमति मांगी थी।

निशिकांत दुबे की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भाजपा से जुड़े नेताओं ने न्यायपालिका, खासकर शीर्ष अदालत के खिलाफ कथित तौर पर कार्यकारी निर्णय लेने और न्यायिक आदेशों के माध्यम से कानून लिखने के लिए अपना गुस्सा जाहिर किया है।

दुबे ने वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं में शीर्ष अदालत द्वारा हस्तक्षेप किए जाने के तुरंत बाद सीजेआई पर निशाना साधा था, जिसके कारण सरकार विवादास्पद कानून के कुछ प्रावधानों को लागू नहीं करने पर सहमत हुई थी।

इससे पहले उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा था कि देश में न्यायाधीशों की कोई जवाबदेही नहीं है और देश का कानून उन पर लागू नहीं होता है। राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों के संबंध में भारत के राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों की व्याख्या पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के मद्देनजर धनखड़ ने न्यायपालिका पर कटाक्ष किया था।


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