ओडिशा के कोरापुट जंगल में हशीश तेल फैक्ट्री पकड़ी गई. 200 करोड़ के ड्रग नेटवर्क के खुलासे के बाद छत्तीसगढ़ सीमा पर हाई अलर्ट.
ओडिशा के घने जंगलों से सामने आए एक बड़े ड्रग नेटवर्क ने छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कोरापुट जिले में हशीश तेल बनाने की अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि नशे का कारोबार अब सिर्फ गांजे तक सीमित नहीं रहा। करीब 200 करोड़ रुपये के हशीश तेल और गांजे की बरामदगी के बाद छत्तीसगढ़, खासकर रायपुर में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
जंगल में फैक्ट्री, शीशियों में नशा
ओडिशा पुलिस के विशेष ऑपरेशन में 1800 लीटर से ज्यादा हशीश तेल और 1143 किलो गांजा जब्त किया गया है। इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जंगलों के भीतर अस्थायी यूनिट लगाकर गांजे से तेल निकाला जा रहा था। इसका मकसद साफ था कम मात्रा में ज्यादा कीमत वाला नशा तैयार करना, जिसे छोटी शीशियों में भरकर आसानी से राज्यों की सीमाएं पार कराई जा सकें।
छत्तीसगढ़ तक फैली है सप्लाई चेन?
इस बड़े खुलासे के बाद रायपुर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस इंटरस्टेट ड्रग रैकेट की सप्लाई चेन छत्तीसगढ़ में कहां-कहां तक फैली है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ओडिशा से लगे सीमावर्ती जिलों में पहले से ही गांजा तस्करी के कई मामले सामने आते रहे हैं, ऐसे में हशीश तेल जैसे हाई-वैल्यू ड्रग की एंट्री की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रायपुर पुलिस ने ओडिशा पुलिस से संपर्क कर इस नेटवर्क से जुड़े संभावित लिंक की जानकारी मांगी है। साथ ही लोकल नेटवर्क और ट्रांजिट रूट्स की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
तस्करी का कॉरिडोर बना छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ को लंबे समय से गांजा तस्करी का कॉरिडोर माना जाता रहा है। महासमुंद, गरियाबंद और जगदलपुर जैसे जिलों में लगातार गांजे की खेप पकड़ी जाती रही है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले जंगल और ग्रामीण रास्ते तस्करों के लिए सबसे सुरक्षित माने जाते हैं.यही वजह है कि 200 करोड़ रुपये के इस हशीश तेल रैकेट के सामने आने के बाद आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं यह नेटवर्क पहले से छत्तीसगढ़ में सक्रिय तो नहीं था।
आंकड़े क्या कहते हैं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में छत्तीसगढ़ में करीब 16,999 किलो गांजा जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 34 करोड़ रुपये आंकी गई। पुलिस मानती है कि यह सिर्फ पकड़ी गई मात्रा है। अनुमान है कि हर साल ओडिशा से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का गांजा छत्तीसगढ़ में खपाया जाता है। ऐसे में हशीश तेल जैसे महंगे ड्रग का खुलासा इस अवैध कारोबार के कहीं ज्यादा बड़े पैमाने की ओर इशारा करता है।
सीमावर्ती इलाकों पर बढ़ी निगरानी
महासमुंद और गरियाबंद को पहले ही ओडिशा-छत्तीसगढ़ ड्रग रूट के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। अब पुलिस को शक है कि तेल के रूप में तैयार ड्रग्स को कम जोखिम में और तेजी से सप्लाई किया जा रहा था। इसी आशंका के चलते सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग बढ़ा दी गई है और जंगलों से गुजरने वाले रास्तों पर खास नजर रखी जा रही है.अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में छत्तीसगढ़ से जुड़े कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और यह ड्रग नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला हुआ है।