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MP Nursing Exams Banned Without HC Permission

MP में नर्सिंग परीक्षाओं पर बड़ा झटका! हाईकोर्ट ने लगा दी रोक, मचा हड़कंप

मध्यप्रदेश नर्सिंग कॉलेज मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी नर्सिंग परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। 28 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।


mp में नर्सिंग परीक्षाओं पर बड़ा झटका हाईकोर्ट ने लगा दी रोक मचा हड़कंप

MP High Court Exam |

जबलपुर। मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े बहुचर्चित मामले में जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी नर्सिंग परीक्षा का आयोजन हाईकोर्ट की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा।

युगलपीठ ने दिया सख्त निर्देश

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि नर्सिंग काउंसिल द्वारा किसी भी परीक्षा को आगे बढ़ाने से पहले न्यायालय की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह आदेश प्रदेश के नर्सिंग शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।

30 हजार से अधिक कॉलेजों पर असर

इस आदेश का प्रभाव मध्यप्रदेश के हजारों नर्सिंग कॉलेजों पर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में नर्सिंग संस्थान संचालित हैं और इस फैसले से परीक्षा प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा।

फर्जीवाड़े के आरोपों पर सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि कुछ कॉलेजों में नियमों के खिलाफ GNM कोर्स संचालित किया जा रहा है। इनमें से 117 नर्सिंग कॉलेज ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें सीबीआई जांच में अपात्र पाया गया था। आरोप है कि एमपी नर्सिंग काउंसिल ने इन कॉलेजों के छात्रों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित करने के बजाय सीधे अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने का निर्णय लिया।

परीक्षा प्रक्रिया पर रोक

कोर्ट में यह भी बताया गया कि 28 अप्रैल से इन कॉलेजों की परीक्षाएं प्रस्तावित थीं। इस पर युगलपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया कि हाईकोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

अगली सुनवाई 28 अप्रैल को

मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। तब तक नर्सिंग काउंसिल को कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। इस आदेश के बाद नर्सिंग शिक्षा से जुड़े छात्रों और कॉलेजों में स्थिति पर नजर बनी हुई है, क्योंकि आगे की परीक्षा प्रक्रिया अब पूरी तरह न्यायालय के फैसले पर निर्भर होगी।

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