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MP में पीने के पानी का पानी बना जहर, इस रसायन से ग्राउंड वाटर दूषित

MP में पीने के पानी का पानी बना जहर, इस रसायन से ग्राउंड वाटर दूषित

इंदौर के दूषित पानी से मौत का सिलसिला थमा नहीं है कि अब प्रदेश में एक बड़ी त्रासदी का साया पड़ गया है। 39 जिलों के ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट बढ़ा मिला।

mp में पीने के पानी का पानी बना जहर इस रसायन से ग्राउंड वाटर दूषित

भोपालः मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद 18 मौतों और कई दर्जनों के बीमार खबर से पहले ही हड़कंप मचा हुआ है। यह घटना पीने के पानी में सीवेज का पानी मिलने के बाद हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश के लेकर एक और खतरनाक खतरा मंडरा रहा है।

इसको लेकर एक्सपर्ट की राय है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो इंदौर की घटना से भी बड़ी त्रासदी हो सकती है। दरअसल, यह खतरा है ग्राउंड वाटर में बढ़ता जहरीला रसायन है। राज्य के ग्राउंड वाटर सोर्स पर नाइट्रेट का लेवल खतरनाक रूप से बढ़ गया है।

केंद्र सरकार की स्टडी से चौंकाने वाला खुलासा

ग्राउंड वाटर को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से कराए गए एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसके अनुसार, प्रदेश के 55 जिलों में से 39 जिलों में नाइट्रेट का लेवल बहुत अधिक पाया गया है। इनमें इंदौर भी शामिल है। इसके चलते यूपी के बाद एमपी दूसरा राज्य बन गया है। यह रिपोर्ट साल 2025 में अगस्त महीने में जारी की गई थी। वहीं, इस अध्ययन को वार्षिक भूजल गुणवत्ता रिपोर्ट 2024 के आधार पर तैयार किया गया था।

39 जिलों में इंदौर समेत ये खास जिले शामिल

केंद्र सरकार के तरफ से किए गए अध्ययन में 39 जिलों को शामिल किया गया है। इन 39 जिलों में ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट (NO3) की असामान्य मात्रा पाई गई हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, नीमच, बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, खंडवा, खरगोन, मंडला, अनूपपुर, बालाघाट, नरसिंहपुर, जबलपुर, पन्ना, राजगढ़, रीवा, सागर, सतना, सीधी, टीकमगढ़, शहडोल, श्योपुर, शिवपुरी, और उमरिया शामिल हैं।

नाइट्रेट कैसे करता है प्रभावित

नाइट्रेट का उपयोग पौधों के लिए ज़रूरी पोषक तत्व, उर्वरकों का हिस्सा, खाद्य संरक्षक और विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होता है। हालांकि इसका अधिक उपयोग हानिकारक होता है। प्रदेश के भूजल में नाइट्रेट की बढ़ी मात्रा मिलने से चिंता बढ़ा दी है। यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि यह रसायन शरीर के अंदर जाने पर ऑक्सीजन के लेवल को कम कर देता है। इससे जान का खतरा हो सकता है। इससे सबसे अधिक खतरना नवजात बच्चों और छोटी उम्र के बच्चों को होता है। काफी लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि इसका असर इतना धीरे दिखता है कि लोग समझ नहीं पाते हैं।

पानी में नाइट्रेट बढ़ने के कारण क्या हैं

ग्राउंड वाटर में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने के कई कारण हैं। नाइट्रेट की बढ़ी मात्रा को लेकर किए गए अध्ययन के अनुसार, जिलों के कई इलाकों में खराब सीवेज सिस्टम और सेप्टिक टैंक लीकेज की वजह से नाइट्रेट पानी में मिल रहा है। इसके अलावा खेती के समय धान और गेहूं जैसी फसलों में रासायनिक खादों का ज्यादा इस्तेमाल भी इसकी बड़ी वजह है। तेजी से हो रहा शहरीकरण और ग्राउंडवाटर रिचार्ज का गिरता स्तर इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

पानी केंद्र या राज्य किसका विषय

केंद्र की रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि पानी राज्य का विषय है। इसलिए ग्राउंडवाटर का संरक्षण और मैनेजमेंट राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि इसका पूरा भार राज्य सरकार पर नहीं रहता है। केंद्र सरकार अपनी योजनाओं और प्रोजेक्ट के जरिए आर्थिक मदद करती रहती है। ध्यान देने वाली बात है कि साफ पानी सिर्फ सुविधा नहीं है, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है।

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