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दूषित पानी पर एनजीटी सख्त: मध्यप्रदेश सरकार से मांगा जवाब

दूषित पानी पर एनजीटी सख्त: मध्यप्रदेश सरकार से मांगा जवाब

दूषित पानी पर एनजीटी सख्त मध्यप्रदेश सरकार से मांगा जवाब

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने पेयजल में सीवेज की मिलावट के मामले में मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। एनजीटी द्वारा जारी नोटिस में इंदौर में गंदे पानी से मौतों और भोपाल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया पाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। एनजीटी ने इसी तरह के नोटिस राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार को भी भेजते हुए जवाब मांगा है।

एनजीटी ने तीनों राज्यों में पेयजल में सीवेज की मिलावट को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट में जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे उजागर होने की बात कही गई है।

एनजीटी ने माने जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दे

एनजीटी ने माना है कि यह मुद्दे गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़े हैं। प्रथम दृष्टया यह पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के उल्लंघन को दर्शाते हैं। राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों, उनके प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों से इस संबंध में जवाब मांगे गए हैं।

अधिनियमों के उल्लंघन की आशंका

एनजीटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि यह मामला पर्यावरण अधिनियम, 2002 के संभावित उल्लंघन को भी दर्शाता है और पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाता है। पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के महानिदेशक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा सीईए को प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाया है।

सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व शपथ-पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।