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भैंस का मांस बताने वाले डॉक्टर को बचा रहा नगर निगम

भैंस का मांस बताने वाले डॉक्टर को बचा रहा नगर निगम

भैंस का मांस बताने वाले डॉक्टर को बचा रहा नगर निगम

कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने आरोप लगाकर एसआईटी चीफ को ज्ञापन सौंपा

कंपनी से जुर्माना वसूलने की बजाय पैसा लेकर फायदा पहुंचाने का आरोप

भोपाल: मेरठ से गोमांस की आई रिपोर्ट के बाद सिलसिलेवार प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ने एसआईटी चीफ को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया है कि नगर निगम ने लाइव स्टॉक कंपनी से जुर्माना वसूलने की बजाय पैसा लेकर उसे 20 साल के लिए स्लॉटर हाउस का प्लांट असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को सौंप दिया। इसके अलावा लाइव स्टॉक कंपनी की जिस डॉक्टर ने मांस को भैंस का बताया, उसे नगर निगम के अफसर बचा रहे हैं।

अमित शर्मा ने ज्ञापन देते हुए बताया कि महापौर मालती राय ने 28 जून 2024 को छह महीने बाद प्रस्ताव को दोबारा लाने की बात कही थी। इसके बावजूद भोपाल नगर निगम ने जुर्माना वसूलने का काम नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम कमिश्नर ने जुर्माना माफ कर दिया। इसके साथ ही स्लॉटर हाउस चलाने वाली कंपनी को 20 साल के लिए आगे बढ़ा दिया गया। निगम की नोटशीट दिखाते हुए बताया गया कि सभी सहायक यंत्रियों ने इस पर आपत्ति जताई थी। चार लाख रुपये में निगम की जमीन सौंप दी गई। मामले को परिषद में भेजने की बजाय भोपाल की महापौर ने अपने स्तर पर ही निर्णय ले लिया।

घटना से शहर की भावनाओं को काफी ठेस पहुंची

अमित शर्मा का आरोप है कि गोमांस ले जा रहा ट्रक रवाना कर दिया गया। यह फैसला कंपनी की ओर से डॉक्टर अनम खान द्वारा प्रमाणित किया गया था। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें आरोपी क्यों नहीं बनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि नगर निगम को विदेश में निर्यात करने का अधिकार किस कानून के तहत दिया गया है। निगम अधिकारियों, एमआईसी मेंबर और महापौर की कॉल डिटेल को जांच में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा। इन सभी बिंदुओं पर एसआईटी चीफ एसीपी उमेश तिवारी से जांच की मांग की गई है।

अमित शर्मा ने कहा कि इस घटना से शहर की भावनाओं को काफी ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम की ओर से जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा रहा है, इसलिए वे स्वयं सामने आकर सभी दस्तावेज सौंपने आए हैं। वहीं एसीपी उमेश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने जिन बिंदुओं पर जांच की मांग की है, उस संबंध में आला अधिकारियों से निर्णय लिया जाएगा।

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