Breaking News
  • उत्तर प्रदेश में 24 और IAS के ट्रांसफर, 10 DM बदले, 18 घंटे में 64 अफसरों के तबादले
  • JEE मेन सेशन 2 रिजल्ट घोषित: 26 कैंडिडेट्स को 100 पर्सेंटाइल
  • जम्मू के उधमपुर में सड़क हादसा, 21 की मौत
  • तमिलनाडु में ₹1,200 करोड़ से ज्यादा के कैश-गोल्ड और फ्रीबीज जब्त
  • जज को केस से हटाने वाली केजरीवाल की याचिका खारिज
  • तेज गर्मी के चलते योगी सरकार ने 8वीं तक के परिषद स्कूलों की टाइमिंग बदली

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

MP Wheat Procurement Delayed Due to PP Bag Shortag

पीपी बैग की कमी से एमपी में गेहूं खरीदी टली, अब 1 अप्रैल से होगी शुरुआत

पीपी बैग की कमी के कारण मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। पहले 16 मार्च से शुरू होने वाली खरीदी अब 1 अप्रैल से होगी।


पीपी बैग की कमी से एमपी में गेहूं खरीदी टली अब 1 अप्रैल से होगी शुरुआत

PP Bag |

भोपाल। ईरान- अमरीका युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी पर भी दिखने लगा है। गेहूं के पैकिंग में उपयोग होने वाला पॉलीप्रोपाइलीन पीपी बैग की कमी से खरीदी और भंडारण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालात को देखते हुए प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख भी आगे बढ़ा दी है।  

बताया जाता है कि पहले गेहूं को जूट के बोरों में रखा जाता था, लेकिन इस साल से सरकार ने पीपी बैग में गेहूं रखने का फैसला किया था। ये बैग पेट्रोलियम उत्पादों से बनाए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पेट्रोलियम से जुड़े कच्चे माल की कमी से इन बैगों का उत्पादन प्रभावित हो गया है।

खरीदी से पहले बोरों की व्यवस्था जरूरी

बताया जा रहा है कि गेहूं खरीदी शुरू होने से पहले बड़ी मात्रा में बोरों की व्यवस्था करना जरूरी होता है। पहले प्रदेश में 16 मार्च से गेहूं खरीदी शुरू होने वाली थी, लेकिन बैग की कमी को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब प्रदेश में 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू की जाएगी। 

12 लाख किसानों ने कराया पंजीयन

प्रदेश में इस साल गेहूं का उत्पादन अच्छा होने का अनुमान है। करीब 12 लाख किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार लगभग 100 लाख टन तक गेहूं की खरीदी हो सकती है। नागरिक आपूर्ति अधिकारियों का कहना है कि सरकार के पास फिलहाल कुछ मात्रा में बोरे उपलब्ध हैं, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक बने रहे, तो बोरों की कमी की समस्या और गंभीर हो सकती है। 

Related to this topic: