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MP Assembly Adjourned After Protest

MP विधानसभा का सत्र अनिश्चतकाल के लिए स्थगित, कांग्रेस विधायक का शीर्षासन बना चर्चा का केंद्र

एमपी विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित। शिवपुरी के कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने हर्ष फायरिंग मामले में दर्ज एफआईआर के विरोध में गांधी प्रतिमा के सामने शीर्षासन कर सुर्खियां बटोरीं।


mp विधानसभा का सत्र अनिश्चतकाल के लिए स्थगित कांग्रेस विधायक का शीर्षासन बना चर्चा का केंद्र

एमपी विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चकाल के लिए स्थगित |

भोपालः  मध्य प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को कुछ ऐसा हुआ, जिसकी तस्वीरें शाम तक पूरे प्रदेश में घूमने लगीं। बजट सत्र का दसवां दिन था और माहौल पहले से ही गरम। दिन खत्म होते-होते मध्य प्रदेश विधानसभा की  अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन असली चर्चा सत्र से ज्यादा एक कांग्रेस विधायक के विरोध के तरीके को लेकर रही।

बजट सत्र का दिन, हंगामे के साथ समापन

सदन की कार्यवाही सामान्य ढंग से शुरू हुई, लेकिन शून्यकाल आते-आते विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया। शिवपुरी में शिवरात्रि के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने नाराजगी जताई। स्पीकर ने मामले को संबंधित विभाग तक भेजने की बात कही, पर विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा। कुछ देर बहस चली, आवाजें ऊंची हुईं, फिर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। इसके बाद सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी गई।


विरोध का अनोखा तरीका

वॉकआउट के बाद बाबू जंडेल विधानसभा भवन के बाहर गांधी प्रतिमा के सामने पहुंचे और वहीं शीर्षासन कर विरोध दर्ज कराया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी अप्रत्याशित था। कुछ लोग मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे, तो कुछ हैरानी से देखते रह गए।

जंडेल का कहना है कि 15 फरवरी को उनके क्षेत्र में यज्ञ और शिव बारात का आयोजन हुआ था। बड़ी संख्या में साधु-संत और ब्राह्मण मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सिर्फ एक राउंड 'चढ़ीमार' चलाया, जिसे उन्होंने हर्ष फायर बताया। उनके मुताबिक, यह भगवान की खुशी में किया गया था, कोई आपराधिक मंशा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास कोई प्रतिबंधित हथियार नहीं था और उन्हें बेवजह केस में फंसाया गया है।

मेरे खिलाफ बार-बार केस दर्ज होते हैं

जंडेल ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। दिसंबर में गायों के मुद्दे पर आंदोलन के दौरान भी एफआईआर हुई थी। उनका कहना है कि हाईकोर्ट से उन्हें कई मामलों में राहत मिल चुकी है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा, अगर सरकार ने यह केस वापस नहीं लिया तो वे गांधी आश्रम में भी आंदोलन करेंगे और सड़क पर भी उतरेंगे। जेल जाने से उन्हें डर नहीं है, उन्होंने कहा, संघर्ष करना उनकी राजनीति का हिस्सा है।

अवैध कॉलोनियों पर भी गरमाई बहस

सत्र के दौरान कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी सरकार को घेरा। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का विस्तार हो रहा है और इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि तीन महीने के भीतर सख्त कानून लाया जाएगा, ताकि अवैध कॉलोनियों पर रोक लग सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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