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MP CM Announces Bonus, Bhagoria National Status

उड़द पर 600 रुपए बोनस, ‘भगोरिया’ को मिलेगा राष्ट्रीय पर्व का दर्जा; मप्र सीएम का बड़ा ऐलान

मध्य प्रदेश में उड़द पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस का ऐलान। भगोरिया लोकपर्व को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा, जनजातीय क्षेत्रों में पहली कृषि कैबिनेट।


उड़द पर 600 रुपए बोनस ‘भगोरिया’ को मिलेगा राष्ट्रीय पर्व का दर्जा मप्र सीएम का बड़ा ऐलान

भोपाल। विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन सरकार ने किसानों और जनजातीय समाज को लेकर बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में ऐलान किया कि प्रदेश में उड़द की फसल पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। साथ ही मालवा अंचल के जनजातीय इलाकों में मनाए जाने वाले पारंपरिक भगोरिया लोकपर्व को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने का फैसला भी लिया गया है। यह घोषणा होते ही सदन में मेजें थपथपाई गईं।

उड़द किसानों को राहत

मुख्यमंत्री ने कहा कि उड़द उत्पादक किसानों को बेहतर समर्थन देने के लिए सरकार बोनस देगी। ₹600 प्रति क्विंटल की अतिरिक्त राशि सीधे किसानों के खाते में जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे दाल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को बाजार की अनिश्चितता से कुछ राहत मिलेगी। मालवा और निमाड़ के कई जिलों में उड़द प्रमुख फसल है, ऐसे में इस फैसले का सीधा असर हजारों किसानों पर पड़ेगा।

भगोरिया को राष्ट्रीय पहचान

सीएम ने कहा कि मालवा अंचल के जनजातीय क्षेत्रों में मनाया जाने वाला भगोरिया अब राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। भगोरिया सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा है। रंग-बिरंगे हाट, पारंपरिक वेशभूषा और ढोल-मांदल की थाप से पूरा इलाका गूंज उठता है। सरकार का कहना है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने से जनजातीय संस्कृति को सम्मान मिलेगा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

जनजातीय क्षेत्रों में पहली कृषि कैबिनेट

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। इस कदम को सरकार ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के प्रति अपनी प्राथमिकता के रूप में पेश कर रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में फसल विविधीकरण, सिंचाई, समर्थन मूल्य और वनाधिकार से जुड़े मुद्दों पर खास चर्चा हो सकती है। सदन में विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए, लेकिन सरकार ने इसे “किसान और संस्कृति दोनों के सम्मान” का फैसला बताया। 

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