मध्य प्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव फिर से कराए जाएंगे। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने सितंबर 2026 में चुनाव कराने की जानकारी अदालत को दी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लंबे इंतजार के बाद छात्रसंघ चुनाव की राह साफ हो गई है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र के तहत सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। सरकार के इस आश्वासन के बाद अदालत ने मामले में दायर जनहित याचिका का निराकरण कर दिया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बनी सहमति
दरअसल, जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसारी ने जनहित याचिका लगाई थी। उनकी याचिका पर एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट कहा था कि केवल आश्वासन और बहानों से काम नहीं चलेगा। कोर्ट ने सरकार से चुनाव की तय तारीख, शैक्षणिक कैलेंडर और पूरी कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने सितंबर में चुनाव कराने की जानकारी दी।
2017 के बाद नहीं हुए थे चुनाव
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए। पहले कोरोना महामारी और बाद में अन्य कारणों का हवाला देकर चुनाव टाल दिए गए, जिससे प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघों का गठन नहीं हो सका।
चुनाव शुल्क पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ता ने यह मुद्दा भी उठाया कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद विश्वविद्यालयों ने छात्रों से चुनाव शुल्क लेना जारी रखा। उनका दावा है कि वर्षों में यह राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने सरकार से इस राशि का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
सरकार पहले देती रही ये दलीलें
अब तक सरकार छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने के पीछे कानून-व्यवस्था की चुनौती, वर्ष 2006 के प्रोफेसर एच.एस. सभरवाल हत्याकांड का हवाला और चुनावी गतिविधियों से पढ़ाई प्रभावित होने जैसे कारण बताती रही। हालांकि, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने चुनाव कराने की समयसीमा अदालत के सामने रख दी।