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MP Teachers to Act as Wardens to Stop Dropouts

ड्रॉप-आउट रोकने सरकारी स्कूलों के टीचर बनेंगे वार्डन, अनुपस्थित शिक्षकों को लेने बच्चों के घर जाएंगे

मध्य प्रदेश में ड्रॉप-आउट रोकने के लिए नई पहल। अब सरकारी स्कूलों में हर कक्षा का एक शिक्षक ‘वार्डन’ बनेगा, अनुपस्थित बच्चों के घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करेगा।


ड्रॉप-आउट रोकने सरकारी स्कूलों के टीचर बनेंगे वार्डन अनुपस्थित शिक्षकों को लेने बच्चों के घर जाएंगे

mp News |

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। वही स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और ड्रॉप-आउट कम करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। हालांकि ड्राप आउट का मामला पहली बार का नहीं है। हर साल सरकारी स्कूलों के बच्चे आरटीई के कारण कम होते जा रहे हैं। इसे देखते हुए डीपीआई ने नए दिशा-निर्देश जारी किए है, जिसमें प्रत्येक कक्षा में एक शिक्षक को ‘वार्डन’ की जिम्मेदारी दी जाएगी। यह शिक्षक विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर नजर रखेगा, जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहेंगे, उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क करेगा।

जानकारी के अनुसार आठ साल पहले प्रदेश में पहली से 12वीं तक के स्कूलों में करीब 1.60 करोड़ बच्चों का पंजीयन हुआ था। आठ साल बाद इनमें से केवल 1.04 करोड़ बच्चे ही पढ़ाई करने आए। खास बात ये है कि इस दौरान स्कूल शिक्षा का बजट लगभग चार गुना बढक़र 9 हजार करोड़ से 37 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई।

बीते साल 3.43 लाख बच्चों ने रोकी पढ़ाई

बता दें कि प्रदेश में बढ़ते ड्रॉप-आउट को देखते हुए सरकार और शिक्षा विभाग चिंतित है। पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 3.43 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था। इनमें सबसे अधिक 2.66 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं। 52 जिलों में सबसे ज्यादा खरगोन जिले से 20 हजार से अधिक बच्चे ड्रॉप-आउट हुए, जिन्होंने कहीं भी दोबारा प्रवेश नहीं लिया। इस बारे में शिक्षकों का कहना है कि आरटीई नियम का फायदा उठाते हुए अभिभावक सरकारी स्कूलों से बच्चे को निकालकर निजी शालाओं में भर्ती करा रहे हैं। इस वजह से सरकारी शालाओं में ड्राप- आउट की संख्या बढ़ रही है। 

इनका कहना है..

सरकारी शालाओं में इस बार नामांकन बढ़ाने खास रणनीति बनाई है। इसके लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे। इनमें नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप सहित अन्य शासकीय योजनाएं शामिल है। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर स्कूलों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई जाएं।
- शिल्पा गुप्ता, आयुक्त डीपीआई भोपाल।

सरकारी स्कूलों में रंगाई-पुताई के निर्देश

नए सत्र की तैयारियों को लेकर स्कूलों को भी कई निर्देश दिए गए हैं। एक अप्रैल से पहले सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके. इसके अलावा स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का काम 30 मार्च तक पूरा करने को कहा गया है।

23 मार्च से आएंगे रिजल्ट, एक से खुलेंगे स्कूल

लोक शिक्षण संचालनालय डीपीआई के जारी शेड्यूल के मुताबिक सबसे पहले कक्षा 8, 9 वीं और 11 वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम 23 मार्च तक घोषित कर दिए जाएंगे। इसके बाद 24 से 31 मार्च तक विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। एक अप्रैल से प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में नई कक्षाएं शुरू होंगी और प्रवेशोत्सव के साथ विशेष नामांकन अभियान चलेगा।

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