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MP Rice Mill Crisis: 1 Lakh Jobs At Risk

मध्य प्रदेश में धान मिल संकट: 1200 में से सिर्फ 24 मिलें चालू, 1 लाख लोगों पर रोजगार का खतरा

मध्य प्रदेश में धान मिलर्स और सरकार के बीच विवाद के कारण 1200 में से केवल 24 मिलें चल रहीं। करीब 1 लाख मजदूरों के सामने रोजगार संकट, भंडारण और गेहूं खरीदी पर भी असर की आशंका।


मध्य प्रदेश में धान मिल संकट 1200 में से सिर्फ 24 मिलें चालू 1 लाख लोगों पर रोजगार का खतरा

भोपाल। मध्य प्रदेश में धान मिलर्स और सरकार के बीच जारी विवाद अब गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। इस तनातनी का सीधा असर प्रदेश के मजदूरों पर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि राज्य की करीब 1200 धान मिलों में से केवल 24 मिलें ही फिलहाल संचालित हो रही हैं, जिससे लगभग एक लाख लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

 प्रति क्विंटल धान से चावल की मात्रा

इस पूरे विवाद की जड़ धान से चावल निकालने की मात्रा को लेकर है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार प्रति क्विंटल धान से अधिक मात्रा में चावल प्राप्त करने की अपेक्षा कर रही है, जैसा कि अन्य राज्यों में किया जाता है। वहीं, मिलर्स का कहना है कि मध्य प्रदेश के धान की गुणवत्ता के कारण वे प्रति क्विंटल केवल लगभग 37 किलो चावल ही दे सकते हैं।

मिलर्स का तर्क है कि अधिक उत्पादन की शर्त व्यावहारिक नहीं है और इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होगा। इसी कारण अब तक सरकार और मिलर्स के बीच मिलिंग अनुबंध नहीं हो पाया है।

टेस्ट मिलिंग रिपोर्ट पर भी असहमति

मामले को सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय के निर्देश पर विशेषज्ञों की समिति द्वारा टेस्ट मिलिंग कराई गई थी। इस जांच में भी लगभग 37 प्रतिशत चावल उत्पादन का निष्कर्ष सामने आया। इसके बावजूद सरकार द्वारा इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

भंडारण संकट की बढ़ी आशंका

धान उठाव नहीं होने के कारण सरकारी गोदामों में बड़ी मात्रा में अनाज जमा हो गया है। इस बीच समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी जारी है, जिससे भंडारण की समस्या और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह स्थिति खाद्य आपूर्ति प्रबंधन को प्रभावित कर सकती है।

अधिकारियों की चुप्पी

इस मुद्दे पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर

प्रदेश की धान मिलों में काम करने वाले मजदूर, हम्माल और अन्य श्रमिक इस विवाद से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। एक मिल में औसतन 80 से 100 लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में बड़ी संख्या में मिलें बंद होने से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

सरकार के सामने समय सीमा की चुनौती

खरीफ सीजन 2025-26 में राज्य में 51.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद की गई है। इसमें से बड़ी मात्रा अभी भी प्रोसेसिंग के इंतजार में है। वहीं, केंद्र सरकार की एजेंसियों को निर्धारित समय सीमा तक चावल उपलब्ध कराना भी राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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