मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ही खेमों में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस अपने विधायकों की एकजुटता का दावा कर रही है।
भाजपा की ओर से अभी तक दो उम्मीदवारों के नामांकन हो चुके हैं, लेकिन अब पार्टी तीसरे विकल्प पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व विधायक जीतू जिराती और विनोद गोटिया में से किसी एक को मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भोपाल में बैठकों का दौर, विधायकों को निर्देश
शनिवार रात मुख्यमंत्री निवास पर भाजपा विधायक दल की अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दोनों उपमुख्यमंत्री, प्रदेश प्रभारी और संगठन महामंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में सभी विधायकों को 8 जून तक भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अंतिम समय में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव संभव है।
कांग्रेस का दावा, मीनाक्षी नटराजन को पूरा समर्थन
कांग्रेस की ओर से भी अपनी तैयारी तेज है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक में पार्टी ने दावा किया कि उसके अधिकांश विधायक राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के साथ हैं। कांग्रेस का कहना है कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है और परिणाम उनके पक्ष में जाएगा। बैठक में कई वरिष्ठ नेता वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े।
सियासी बयानबाजी से बढ़ा तापमान
बैठक के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। श्योपुर विधायक बाबू जंडेल के बयान ने माहौल और गर्म कर दिया। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में तीखी टिप्पणी करते हुए राजनीतिक आरोप लगाए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। वहीं, भाजपा नेताओं ने भी कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
विधानसभा में कुल प्रभावी संख्या 228 है। एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत है। भाजपा के पास संख्या बल मजबूत है, लेकिन तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। वहीं कांग्रेस भी अपने विधायकों की एकजुटता के दम पर मुकाबला कड़ा बनाने की कोशिश में है। राजनीतिक समीकरण बताते हैं कि अंतिम समय में क्रॉस वोटिंग या समर्थन बदलाव चुनाव के नतीजे तय कर सकता है।
अंतिम दिन पर टिकी निगाहें
नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून होने के कारण अब पूरा राजनीतिक ध्यान इसी दिन पर टिक गया है। दोनों दलों की रणनीति अंतिम समय तक बदल सकती है। राज्यसभा चुनाव अब सीधे-सीधे संख्या बल से आगे बढ़कर राजनीतिक रणनीति और अंदरूनी समीकरणों की लड़ाई बन गया है।