इंदौर संभाग में मानसून सीजन अब तक ज्यादातर जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज हुई है। बुरहानपुर, खरगोन और देवास इससे अलग हैं। इंदौर जिले में भी बारिश औसत से 10 फीसदी पीछे हैं।
इंदौर। इस समय भले मानसून एक्टिव है। लेकिन इंदौर सहित प्रदेश में मानसून की बेरुखी जारी है। इतना ही नहीं इंदौर संभाग में मानसून की बारिश अब तक उम्मीद के मुताबिकि नहीं हुई है। बुरहानपुर,खरगोन और देवास जिले को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश जिलों में वर्षा औसत से नीचे हैं। इतना ही नहीं इंदौर जिले में भी सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है। ऐशे में संभाग के लोगों को भारी बारिश के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
दरअसल, प्रदेश की तस्वीर भी बहुत राहत देने वाली नहीं है। मध्य प्रदेश में अब तक औसत से 19 फीसदी से कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से में कमी 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत है। इंदौर शहर में इस मानसून सीजन में अब तक 400 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश से 133.2 मिलीमीटर कम है।
मानसून की बारिश पूर्वी हिस्से में जोरदार
फिलहाल बारिश का मुख्य असर पूर्वी मध्य प्रदेश में देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ऊपर कम दबाव (लो प्रेशर) का क्षेत्र बना हुआ है। मानसून द्रोणिका बीकानेर और ग्वालियर से होते हुए कम प्रेशर वाले एरिया के मध्य हिस्से से पुरी तक और फिर पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली है। अफगानिस्तान के आसपास पश्चिमी विक्षोभ भी एक्टिव है। इसके अलावा दक्षिण- मध्य महाराष्ट्र के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
कहा दिख रहा वेदर सिस्टम का प्रभाव
इन मौसम प्रणालियों का असर पूर्वी मध्य प्रदेश में ज्यादा दिखाई दे रहा है। शनिवार को मध्य प्रदेश में सात स्थानों पर अति भारी और 19 स्थानों पर भारी बारिश दर्ज हुई। मौसम के ताजा हाल की बात करें तो रविवार के दिन भी भोपाल सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश का असर दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग की मानें तो भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर और शहडोल संभागों के जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान जोरदार बारिश दर्ज की गई। इतना ही नहीं रीवा, सागर और ग्वालियर-चंबल संभागों के कुछ स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। हालांकि इंदौर-उज्जैन संभाग में कुछ ही जगह बारिश हुई।
इंदौर में कैसा रहेगा अगला सप्ताह
इंदौर संभाग के लिए अगले सप्ताह भी व्यापक बारिश की तस्वीर साफ नहीं है। प्रभावी मानसून सिस्टम की कमी के कारण ज्यादातर जिलों में छिटपुट बारिश ही होने की संभावना है। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग इलाकों में बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। लेकिन पूरे संभाग में अच्छी बारिश की उम्मीद फिलहाल कमजोर है।
आने वाले कुछ दिन कैसा रहेगा प्रदेश का मौसम
मौसम विज्ञान की मानें तो मध्य प्रदेश में बारिश से पूरी तरह से राहत मिलने की संभावना बहुत कम है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते 11-12 अगस्त के दिन प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है। वहीं,पूर्वी हिस्से में गरज-चमक के साथ मौसम एक्टिव रह सकता हैं। इसके बाद 13-14 अगस्त को पूर्वी हिस्से में फिर से भारी बारिश के आसार है। मौसम विज्ञान की मानें तो अगले कई दिनों तक प्रदेश में मानसूनी गतिविधियाँ बनी रह सकती हैं।