मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में हाई कोर्ट ने मेरिट लिस्ट दोबारा बनाने के आदेश दिए हैं। फर्जी बोनस अंकों और अपात्र अभ्यर्थियों को लेकर बड़ा फैसला आया है।
मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में चयनित हजारों उम्मीदवारों को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जबलपुर हाई कोर्ट ने कथित फर्जी बोनस अंकों के मामले में मेरिट लिस्ट दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन उम्मीदवारों ने बिना वैध आरसीआई प्रमाणपत्र के पांच प्रतिशत बोनस अंक हासिल किए है। उनको भी चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
इस फैसले का असर 13 हजार से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है। मामला सिर्फ भर्ती विवाद तक सीमित नहीं है। कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बोनस अंकों के खेल ने बदली पूरी मेरिट
याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के भर्ती नियमों के तहत सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को पांच प्रतिशत बोनस अंक मिलने थे, जिनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद यानी RCI से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा हो। लेकिन चयन सूची में करीब 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक हासिल कर लिए।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि आरसीआई के आधिकारिक रिकॉर्ड में मध्य प्रदेश में इतने पंजीकृत उम्मीदवार ही मौजूद नहीं हैं। यही वजह रही कि वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों की मेरिट नीचे चली गई और कई उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर उम्मीदवारों को पकड़े जाने के बाद अंक कम करवाने या विकल्प बदलने की छूट दी जाती है, तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने इसे “बेईमानी को बढ़ावा देने” जैसी स्थिति बताया। साथ ही राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को निर्देश दिए।
इसके अनुसार, गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारकों की अभ्यर्थिता खत्म कर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाए। हाई कोर्ट ने उन याचिकाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें कुछ उम्मीदवारों ने यह दलील दी थी कि उन्होंने जल्दबाजी या गलती से बोनस अंक का विकल्प चुन लिया था।
विभाग को पहले ही मिल चुका था अलर्ट
याचिका में यह भी सामने आया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने जनवरी 2026 में ही विभाग को चेतावनी दी थी कि लगभग 18 हजार उम्मीदवारों ने बोनस अंक के लिए “हां” का विकल्प चुना है, जो असामान्य संख्या है। इसके बावजूद कर्मचारी चयन मंडल ने न तो आरसीआई पंजीकरण संख्या मांगी और न ही किसी प्रकार का भौतिक सत्यापन किया। सिर्फ उम्मीदवारों के ऑनलाइन डिक्लेरेशन के आधार पर बोनस अंक जोड़ दिए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि समय रहते दस्तावेजों की जांच होती तो पूरी भर्ती प्रक्रिया विवादों में नहीं घिरती।
13 हजार से ज्यादा चयनित उम्मीदवारों पर असर
कोर्ट के इस फैसले से 13,089 चयनित उम्मीदवार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। अब कर्मचारी चयन मंडल को नई मेरिट सूची तैयार करनी होगी, जिसमें सिर्फ वैध आरसीआई प्रमाणपत्र धारकों को ही बोनस अंक दिए जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का मानना है कि नए सिरे से मेरिट बनने के बाद चयन सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई बाहर हुए उम्मीदवारों को मौका मिल सकता है, जबकि पहले से चयनित कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटक सकती है। इस फैसले के बाद राज्य में अन्य भर्ती परीक्षाओं की सत्यापन प्रक्रिया पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।