एमपी के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का स्वदेश में इंटरव्यू। रीवा-विंध्य विकास, स्वास्थ्य व्यवस्था, मेडिकल कॉलेज, डॉक्टरों की कमी और विपक्ष की भूमिका समेत कई मुद्दों पर बात की।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में यूं तो बहुत सारे चेहरे चर्चाओं में रहते हैं। लेकिन कुछ चेहरे ऐसे हैं जिनकी चर्चा चाहे पक्ष के नेता हों या विपक्ष के, बड़े सम्मानजनक तरीके से करते हैं और अक्सर विवादों से दूर भी रहते हैं। उन्हीं सम्मानजनक चेहरों में से एक मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम और मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल हैं। उन्होंने उन तमाम उन मुद्दों पर अपने विचार रखे जिसकी चर्चा इस वक्त प्रदेश में जोर शोर से हो रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बयानबाजी से बचने का बताया राज
एक तो बचपन से ही जो संस्कृति और जो संस्कार मिलते हैं तो बचपन से ही वह फिर आ जाते हैं कि किसी ने आपको कुछ कहा। जब आप जवाब देंगे तो फिर वह कुछ बोलेगा। फिर आप जवाब देंगे तो फिर वह बोलेगा। इसमें बहुत समय खराब होता है। यदि किसी ने कुछ कहा है, गलत कहा है तो जनता की नजर में अपने आप ही गिर जाएगा। हमें जवाब देकर और उसको कमजोर करने की जरूरत नहीं है। सार्वजनिक आदमी हमेशा जनता की नजरों में रहता है। हम दो आंखों से लोगों को देखते हैं। हम लोगों को हजारों आंखें देखती हैं। कौन क्या बयान दे रहा है, जनता उसका मूल्यांकन करती है।
सिर्फ रीवा के विकास चिंता करने के आरोप पर दी सफाई
आप पर आरोप यह है कि आप सिर्फ रीवा की चिंता करते हैं और सतना की चिंता नहीं करते। ऐसे आपके विरोधी इस तरह के आरोप लगाते हैं, आज उन आरोपों पर आप क्या बोलना चाहेंगे? क्या वास्तव में सिर्फ रीवा की चिंता करते हैं?
इन आरोपों पर उन्होंने सफाई देते हुए डेप्युटी सीएम ने कहा कि यह बात गलत है। उन्होंने कहा कि समूचे विंध्य का बहुत तेजी के साथ विकास हो रहा है। यदि सतना से सिंगरौली तक फोर लेन की सड़क बनी है और कटनी से रीवा तक की सड़क बनी है। एमपी यूपी बॉर्डर, चाकघाट और हनुमना तक सड़क बन गई। रीवा और सीधी के बीच में टनल बन गई। सिंचाई की नहरों के जाल के लिए यदि विंध्य क्षेत्र में सोन नदी का पानी आ गया तो सतना जिले में नर्मदा जी का पानी एनवीडीए के माध्यम से एक सुरंग के जरिए शुरू हो गया।
यदि सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल विकसित नहीं होगा तो अकेले रीवा के विकसित हो जाने से विंध्य क्षेत्र तरक्की की ऊंचाई पर नहीं पहुंचेगा। कोई काम थोड़ा आगे हो रहा है, कोई काम पीछे हो रहा है। उन्होंने आरोप को निराधार बताते हुए सतना के स्मार्ट सिटी वाली घटना का जिक्र किया। शुक्ल ने बताया कि विंध्य के किसी शहर को स्मार्ट सिटी में जोड़ने की बात आई थी। उस समय मैं प्रभारी मंत्री था। तब मैंने कहा कि सतना को आप इसमें शामिल करिए। रीवा को तो हम अपने तरीके से स्मार्ट सिटी बना लेंगे। इसलिए सतना को स्मार्ट सिटी में शामिल कराया।
अजय सिंह की सक्रियता पर क्या बोले?
डेप्युटी सीएम ने आगामी चुनाव और अपने क्षेत्र के विपक्षी नेताओं की सक्रियता पर भी खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने अजय सिंह की सक्रियता पर कहा कि पिछली बार चुनाव तो हार गए थे और यदि गतिविधियाँ नहीं सुधरेगी तो हो सकता है अगली बार परेशानी हो? उन्होंने आगे कहा कि देखिए, 2018 में विंध्य में 30 में 24 सीटें बीजेपी की आई। इस बार के चुनाव में 30 में 25 सीटें आई। अगली बार हमारा टारगेट है 30 में 30 सीटों का है। अगर भाजपा जीते तो 30 में 30 जीतेंगे।
स्वास्थ्य विभाग को खुद कितने नंबर देंगे?
अपने विभाग को नंबर देने पर उनकी चौंकाने वाली प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा कि देखिए, जब मैं स्वास्थ्य मंत्री बना तो मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर में सुधार की दिशा में काम किया। 2003 में मातृ मृत्यु दर 450 थी। अब उसको हम 100 के नीचे ले जाने वाले हैं। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर है जो 2003 में 80 के ऊपर थी। हमें इसको नेशनल एवरेज के नजदीक ले जाना है। विशेषज्ञ और मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ में लगभग 3000 पदों की स्वीकृति कराई है। उसकी भर्तियां हो रही हैं। मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपए स्वीकृत कराए हैं। रीवा में करीब साढ़े 400 करोड़ स्वीकृत हुआ और काम चालू है। मेडिकल के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी उछाल है।
रीवा मेडिकल कॉलेज की वायरल तस्वीर पर क्या बोले?
रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज से एक तस्वीर निकलकर आती है कि एक महिला की डेथ होती है और बता रहे हैं कि उसमें कीड़े रेंग रहे थे। इतनी लापरवाही हो जाती है। पहले तो यह क्या वास्तव में ऐसा हुआ है?
इस पर उन्होंने वास्तविकता बताते हुए कहा कि जब मैंने वहां के डीन, सुपरिटेंडेंट और एचओडी से बात की है तो उनका यह कहना था कि पांच दिन पहले उसका ब्रेन डेड जरूर हो गया था। लेकिन हार्ट चल रहा था। मेडिकल प्रोटोकॉल में यह रहता है कि जब तक हार्ट चलता है तब तक डेड घोषित नहीं करते। जहां तक मुंह में कीड़े आने का सवाल है तो उस दौरान कोई फ्लाइंग मक्खी या कीड़े होते हैं। वह जरूर उनके मुंह पर रहे और उसके कारण ऐसा हुआ। फोटो खींचकर और उसको इस प्रकार से प्रचारित करना दुष्प्रचार है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव के बीच डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी?
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधरी है तो दूसरे राज्यों के मरीज भी मध्यप्रदेश में आते हैं। दबाव तो है। इस दबाव के निपटारे के लिए क्या आपको लगता है कि डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना चाहिए? मेडिकल की सीटों की संख्या और बढ़ने की जरूरत है? बहुत अच्छा सवाल आपने किया है कि हमें एमबीबीएस की सीटों को बढ़ाना चाहिए। आपको खुशी है कि जो डेढ़ सौ सीटों वाला रीवा का एमबीबीएस था, वह 200 सीट इसी साल हुआ है। इसी प्रकार ग्वालियर में भी सीटें बढ़ाने का काम हुआ है। एक तरफ बेड भी बढ़ाते जा रहे हैं, दूसरी तरफ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के जितने प्रयास हो सकते हैं। बिल्डिंग का जब लोकार्पण करें तो ह्यूमन रिसोर्स रिक्रूट होकर वहां ज्वाइन कर चुका है। यह प्लानिंग के साथ हम दोनों चीज चला रहे हैं।
जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन और स्टाइपेंड की मांग पर क्या कहा?
जूनियर डॉक्टरों की अभी आंदोलन जो हुआ, उनकी जो मांग है उस पर सुनवाई पहले हो जानी चाहिए। ऐसी नौबत क्यों आए कि उनको आंदोलन करना पड़े? इस प्रोटेस्ट को क्लियर करते उन्होंने हुए बताया कि यह जूनियर डॉक्टर का मामला नहीं था। यह इंटर्न का मामला था। जूनियर डॉक्टर को तो 70, 75, 80 हजार पहले से ही मिल रहा है। मुद्दा इंटर्न तक का था, जिनको मिलता था क्योंकि अभी डॉक्टर नहीं बने। अभी डॉक्टर बनने की प्रोसेस में हैं। स्टाइपेंड की डिमांड उन्होंने की तो आमतौर पर वह मिले थे और हम लोग उसमें पॉजिटिव थे। मुख्यमंत्री जी से चर्चा भी हो गई थी। बातचीत के बाद समाधान भी निकल गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी कैसे दूर होगी?
एमबीबीएस हर वर्ष साढ़े तीन चार हजार बच्चे निकलते हैं जिनको बॉन्ड की काउंसलिंग करके पोस्टिंग की जाती है। यदि साढ़े तीन चार हजार बच्चे हर साल जाकर गांवों में पहुंच जाएं तो मध्यप्रदेश में यह चर्चा बंद हो जाए कि डॉक्टरों की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में है। आप अपने प्रोफेशन के प्रति भी उतने ही संवेदनशील होकर ज्वाइन करें। गांव में बिताए हुए दिन आपको जीवन भर अपने प्रोफेशन के प्रति जिम्मेदार बनाए रखेंगे।
क्या आम आदमी सीधे स्वास्थ्य मंत्री तक अपनी समस्या पहुंचा सकता है?
संभव है बिल्कुल संभव है। हमारे यहां जो हमारे स्टाफ के लोग हैं, उनको इस मामले में हम काफी सेंसिटिव करके रखते हैं। लोग हमारे ऑफिस में भी आते हैं। हमारे ऑफिस में जो हमारे पीए और सहायक हैं उनके नंबर भी अब मध्यप्रदेश में बहुत सारे लोगों के पास हैं। व्हाट्सएप मैसेज भी करते रहते हैं और इसको हम और ज्यादा पुख्ता करेंगे। एचएमआईएस पोर्टल हम विकसित कर रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत पेपरलेस सिस्टम और हर आदमी की आईडी बन जाए। सरकारी और प्राइवेट डॉक्टरों का इंटीग्रेशन हो जाए तो लोग आसानी से आईटी के माध्यम से अपनी सुविधा और सर्विसेज लेना शुरू कर सकें।
राहुल गांधी और विपक्ष की भूमिका पर क्या बोले राजेंद्र शुक्ल?
जितना पक्ष का महत्व है, लोकतंत्र में उतना ही विपक्ष का भी महत्व है। मुद्दे उठाना चाहिए, जनता के मुद्दे उठाना उनका कर्तव्य है। लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। संवाद का सेतु टूटना नहीं चाहिए। अटल जी जब विपक्ष के नेता थे तो प्रधानमंत्री से कम उनका कद नहीं था। उनकी लोकप्रियता उतनी ही थी। विपक्ष में रहते हुए सत्ता की कोई संभावना न होते हुए भी वह कभी प्रधानमंत्री के कद से कम नहीं लगे। भाषा का उनके ऊपर नियंत्रण था। वह अपनी बातें भी कर देते थे, व्यंग्य भी कर देते थे, हंसी मजाक भी हो जाता था।
स्वास्थ्य विभाग को 10 में कितने नंबर देंगे?
यह हम खुद नंबर दे दें, यह तो अच्छी बात नहीं है। नंबर तो जनता को देना है। अभी हमारा काम बचा है तो हम उस काम को पूरा करने में लगे हुए हैं। एक जो बचा है कि हम ग्रामीण क्षेत्र में जो हमारी ब्लॉक लेवल पर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर है, जिसमें छह विशेषज्ञ होते हैं। सभी साढ़े 300 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में सारे छह विशेषज्ञ पहुंच जाएं। इसके लिए जो हमारा प्रयास चल रहा है, वह काम अभी हमारा बाकी है।
बस काम होता रहे और जनता उसका आकलन करें कि काम अच्छा हुआ है या कम रह गया है या और क्या सुधार करना है। जो नंबर है वह नंबर इस इंटरव्यू को सुन रही जनता दे। वह बताएं कि उनको राजेंद्र शुक्ला से और क्या अपेक्षाएं हैं।