मध्यप्रदेश में ओवरलोड वाहनों से सड़कें बदहाल। नई चेकपॉइंट व्यवस्था में तौल कांटे नहीं, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई ठप, परिवहन विभाग पर उठे सवाल
मप्र में वाहन और चालक की अनियमितताओं-कमियों पर किए जा रहे चालान
पांच राज्यों से सटी मप्र की सीमाओं पर मप्र परिवहन विभाग ने पुरानी चेकपोस्ट व्यवस्था समाप्त कर नई चेकपॉइंट व्यवस्था शुरू की है। इस नई व्यवस्था में विभाग के पास निजी अथवा व्यवस्थागत तौलकांटे उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण प्रतिदिन हजारों की संख्या में गुजर रहे ओवरलोड ट्रक, डंपर और ट्रॉले मप्र की सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ा रहे हैं। तौल कांटे के अभाव में जहां विभागीय जांच अमला इन वाहनों पर ओवरलोडिंग के आधार पर चालानी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है, वहीं कई वाहन मालिक और चालक भी ओवरलोडिंग के नाम पर चालान का दबाव बनाने के आरोप विभागीय अमले पर लगा रहे हैं।
चेकपोस्ट बंद, नई व्यवस्था अधूरी
उल्लेखनीय है कि मप्र परिवहन विभाग के सभी चेकपोस्टों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जुलाई 2024 से बंद कर दिया था। राज्य के राजमार्गों से होकर गुजरने वाले वाहनों में कमियों, परिवहन नियमों की अवहेलना और ओवरलोडिंग पर नजर रखने तथा चालानी कार्रवाई के लिए मप्र में गुजरात राज्य की तरह डिजिटल, पारदर्शी और चेकपोस्ट-मुक्त ट्रांसपोर्ट चेकिंग व्यवस्था लागू की जानी थी।
तौलकांटे नहीं, तो चालान कैसे?
नई प्रस्तावित व्यवस्था के लागू होने तक राज्य की सड़कों से गुजरने वाले वाहनों की जांच के लिए 45 अस्थायी चेकपॉइंट स्थापित किए गए। इसके अलावा राजमार्गों पर परिवहन उड़नदस्ते भी तैनात किए गए हैं। चेकिंग के दौरान वसूली के आरोप-प्रत्यारोपों के साथ वाहन चालकों और परिवहन अमले के बीच झड़पों के वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। कई दुर्घटनाएं भी सामने आई हैं।
परिवहन अमला बीमा, फिटनेस, ओवरहाइट, लाइसेंस, सीट बेल्ट, आरसी, पीयूसी और एचएसआरपी जैसे मामलों में ही ऑनलाइन चालानी कार्रवाई कर रहा है। लेकिन तौलकांटे की व्यवस्था नहीं होने से ओवरलोडिंग के मामलों में कार्रवाई नहीं हो पा रही है। खास बात यह है कि ई-वे बिल, विल्टी अथवा टैक्स इनवॉइस में वाहन के अंडरलोड या ओवरलोड होने का स्पष्ट प्रमाण नहीं होने से ऐसे मामलों में कोर्ट द्वारा ऑनलाइन चालान निरस्त कर दिए जाते हैं।
नहीं हो रहा बॉडी-वॉर्न कैमरे का उपयोग
वाहन चेकिंग के दौरान विभागीय जांच दल और चालक के बीच होने वाली बातचीत सहित जांच से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि को वाहन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पोर्टल पर ऑनलाइन रिकॉर्ड किया जाना था, ताकि कार्रवाई के दौरान अभद्रता या विवाद की स्थिति बनने पर उसका प्रमाण उपलब्ध हो सके। इसी उद्देश्य से विभाग ने जांच दल को बॉडी-वॉर्न कैमरे सौंपे हैं। इन कैमरों का ऑनलाइन एक्सेस वाहन पोर्टल और मुख्यालय से भी जोड़ा जाना था। हालांकि, ज्यादातर समय चेकिंग के दौरान इनका उपयोग नहीं किया जा रहा है।
अब तक नहीं मिले पोर्टेबल हैंडहेल्ड व्हील वेईगर
पूर्व परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा द्वारा चेकपॉइंट व्यवस्था के लिए जारी दिशा-निर्देशों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। ओवरलोडिंग की जांच के लिए विभागीय अमले को पोर्टेबल हैंडहेल्ड व्हील वेईगर उपलब्ध कराने का भी उल्लेख था, लेकिन अब तक ये उपकरण अमले को नहीं मिल पाए हैं।