भोपाल। मध्यप्रदेश के सभी 33 सरकारी और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में अब शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन अलग- अलग बनेगा। ये निर्देश आगामी त्योहारों को देखते हुए दिए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस निर्देश का जूनियर डॉक्टरों ने स्वागत किया है। बता दें कि प्रदेश में वर्तमान में निजी और सरकारी मिलाकर लगभग 33 कॉलेज है। अगले दो साल में 18 और नए कॉलेज के खुलने से इनकी संख्या बढक़र 32 हो जाएगी।
इन कॉलेजों के मेस में एक ही किचन है, जिससे धार्मिक पर्वों के दौरान डाक्टरों को खाना खाने में परेशानी होती थी। इसे देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने धार्मिक पर्वों को ध्यान में रखते हुए कॉलेजों की मेस में शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के लिए अलग-अलग किचन रखने के निर्देश जारी कर दिया हैं। इसका उद्देश्य सभी विद्यार्थियों की धार्मिक भावनाओं एवं आस्थाओं का सम्मान करना तथा किसी की भावनाएं आहत न हों, यह सुनिश्चित करना है।
संचालक चिकित्सा शिक्षा ने निर्देश में कहा है कि जिन चिकित्सा महाविद्यालयों की मेस में मांसाहारी भोजन बनाया जाता है, वहां शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन के लिए अलग-अलग किचन की व्यवस्था की जाएं।
जूडा ने निर्णय को बताया सकारात्मक
जूडा भोपाल के उपाध्यक्ष डॉ. अनुराग भारती ने अलग- अलग किचन के इस निर्णय को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि सभी लोगों की खाने की आदतें अलग-अलग होते हैं। ऐसे में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए अलग किचन होना ही चाहिए। डॉ. भारती ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों की मेस में आम तौर पर भी एक ही किचन में वेज और नॉनवेज भोजन अलग-अलग तैयार होता है। इसकी सर्विंग और कुकिंग की व्यवस्था भी अलग रहती है। इसमें किसी तरह की नकारात्मक बात नहीं है और सभी के सेंटीमेंट्स का सम्मान होता है।