मध्य प्रदेश सरकार ने सरसों पर भावांतर योजना लागू करने का संकेत दिया है, उड़द पर बोनस और दलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा है।
भोपाल। आज बजट सत्र के छठवें दिन विधानसभा में किसानों को लेकर एक बड़ी घोषणा सुनी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरसों पर भी भावांतर भुगतान योजना लाने की दिशा में सरकार काम कर रही है, ताकि जब मंडी भाव MSP से नीचे जाएं तो सरकार किसान के खाते में अंतर राशि भेजे, और कोई नुकसान न झेलना पड़े। यह फैसला किसानों में चर्चा का विषय बन गया है, खासकर सरसों उत्पादकों के बीच।
भावांतर का दायरा बढ़ेगा?
मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि जैसे सोयाबीन के लिए भावांतर योजना पहले ही लागू है, अब सरसों सहित अन्य तिलहन और दलहन फसलों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार हो रहा है। इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके।
उड़द पर बोनस की घोषणा
सरकार ने उड़द (urad) पर बोनस देने का भी उल्लेख किया, ताकि दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिले और किसान की आमदनी बेहतर हो। बोनस राशि के लिए बजट में लगभग ₹150 करोड़ की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है, जो किसानों के खाते में सीधे राहत के रूप में जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस केवल समर्थन मूल्य देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दलहन उत्पादन बढ़ाने, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने और किसान को “ऊर्जा दाता” यानी आत्मनिर्भर किसान बनाने पर भी है। किसानों के ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे ताकि वे बिजली-उत्पादन जैसे विकल्प से अपनी आय बढ़ा सकें। यह घोषणा कुछ हद तक केंद्र की योजनाओं से भी मेल खाती है, जिन्हें राज्य में भी आगे बढ़ाने की कोशिशें हैं।

विधानसभा में कांग्रेस का विरोध
इससे पहले विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने सरसों भावांतर, बोनस व किसान मुद्दों को लेकर सदन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार को अब शीघ्र प्रभावी कदम उठाने चाहिए और फसलों के सही दाम सुनिश्चित करना चाहिए, न की केवल घोषणाओं तक ही रह जाना चाहिए।
किसान को राहत व उत्पादन को बल
मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा पहले से लागू नीतियों से प्रदेश में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आमदनी में सकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना और बोनस से किसानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी और वे टिकाऊ खेती व बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर होंगे। लंबे समय से MSP, भावांतर और बोनस जैसी योजनाओं को लेकर किसानों की मांग रही है कि जब बाजार भाव MSP के नीचे गिरता है, तो सरकार को अंतर राशि का भुगतान करना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार अब इसे अपने कृषि सुधार एजेंडे का अहम हिस्सा बना रही है।