प्रदेश सरकार ने होलिका दहन को लेकर नए सिरे से निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत गांव या शहर में होलिका दहन करने वाली संस्था या व्यक्तियों को पंजीयन कराना होगा। हालांकि निर्देश में पंजीयन को अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे होलिका दहन के लिए गांव और शहरों में टीमों का गठन करें।
दहन स्थलों पर रहेगा प्रशासन की नजर
ये टीमें होलिका दहन के दिन संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यक्रमों का भ्रमण करेंगी और जलाऊ एवं इमारती लकड़ी के स्थान पर गौकाष्ठ के उपयोग को प्रोत्साहित करेंगी। सरकार का दावा है कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर लिया गया है.निर्णय के अनुसार, होलिका दहन में लकड़ी के स्थान पर उपलों और गौकाष्ठ का प्रयोग किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और पानी बचाने को लेकर भी जागरूकता फैलाई जाएगी।
कलेक्टरों को दिए निर्देश
कलेक्टरों को कहा गया है कि जिले में विभिन्न स्तरों पर आयोजित किए जाने वाले सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रमों का निःशुल्क पंजीयन कराने की व्यवस्था की जाए। यह पंजीयन सभी जिला मुख्यालयों में पीओएस मशीन के माध्यम से तथा अन्य स्थानों पर तहसील और नगरीय निकायों के जरिए किया जाएगा।
पंजीयन के लिए जिला स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार एवं सूचना प्रसारण किया जाएगा। नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं को प्राकृतिक और हर्बल रंगों से होली खेलने, पशु-पक्षियों पर रंग न डालने के संकल्प के साथ इस अभियान में शामिल किया जाएगा।पंजीयन के समय आयोजक संस्था की संक्षिप्त जानकारी, जैसे पदाधिकारी का नाम, संपर्क नंबर आदि प्राप्त किए जाएंगे। इसके अलावा होलिका दहन के दिन मैदानी अमले के साथ इन संस्थाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक होलिका दहन कार्यक्रमों का भ्रमण कर, जलाऊ एवं इमारती वनों की लकड़ी के स्थान पर गौकाष्ठ आधारित होलिका दहन को प्रोत्साहित किया जाएगा।सरकार ने लोगों से हर्षोल्लास के साथ, लेकिन संयम और भाईचारे की भावना बनाए रखते हुए होली का त्योहार मनाने की अपील भी की है।