NFHS-6 रिपोर्ट में खुलासा, 5 साल में पुरुषों में हाई ब्लड शुगर के मामले 50% और महिलाओं में 48% तक बढ़े, NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में हाई ब्लड शुगर और डायबिटीज के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज
भोपाल। मध्य प्रदेश में डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार की राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में महिलाओं और पुरुषों दोनों में हाई या बहुत हाई ब्लड शुगर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और असंतुलित खानपान का परिणाम मान रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में हाई या बहुत हाई ब्लड शुगर (या ब्लड शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वाली) की दर 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.5 प्रतिशत हो गई है। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 18.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
5 साल में तेजी से बढ़े मामले
NFHS-5 (2019-21) और NFHS-6 (2023-24) के आंकड़ों की तुलना करें तो महिलाओं में हाई ब्लड शुगर के मामलों में करीब 48 प्रतिशत और पुरुषों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि अब प्रदेश की लगभग हर सातवीं महिला और हर पांचवां पुरुष हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज के खतरे से जूझ रहा है।
प्रमुख आंकड़े
-
महिलाओं में हाई/बहुत हाई ब्लड शुगर: 9.8% से बढ़कर 14.5%
-
पुरुषों में हाई/बहुत हाई ब्लड शुगर: 12.2% से बढ़कर 18.3%
-
महिलाओं में वृद्धि: करीब 48%
-
पुरुषों में वृद्धि: करीब 50%
-
अब हर 7वीं महिला और हर 5वां पुरुष हाई ब्लड शुगर की समस्या से प्रभावित
लाइफस्टाइल बीमारियों की बढ़ती चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक श्रम में कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या जैसी वजहों से लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं। डायबिटीज केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि इससे हृदय रोग, किडनी संबंधी समस्याएं, आंखों की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा असर
पहले डायबिटीज को शहरी आबादी की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि समय पर जांच और जागरूकता की कमी के कारण कई मरीजों को बीमारी का पता देर से चलता है।
विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, वजन नियंत्रण और तनाव प्रबंधन को डायबिटीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानते हैं। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने पर इसके गंभीर प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है।