मध्य प्रदेश में 2 मार्च से प्रस्तावित बस हड़ताल टली। सरकार ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के राजपत्र रद्द कर नई कमेटी बनाकर चर्चा का फैसला लिया। यात्रियों को राहत।
भोपाल। मध्य प्रदेश में 2 मार्च से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बस हड़ताल ने आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर ला दिया। देर रात चली बैठक के बाद राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में जारी राजपत्रों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और नई कमेटी बनाकर व्यापक चर्चा करने का फैसला लिया। इसके साथ ही प्रदेशभर में यात्रियों पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। बस ऑपरेटरों के संगठनों ने हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी है।
देर रात बैठक, डेढ़ घंटे की मैराथन चर्चा
मुख्यमंत्री आवास पर सहमति का रास्ता बना। सीएम मोहन यादव ने बस ऑपरेटरों को भरोसा दिलाया कि बिना सहमति के कोई निर्णय लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री निवास पर रात करीब 9:30 बजे शुरू हुई बैठक डेढ़ घंटे तक चली। परिवहन सचिव मनीष सिंह भी मौजूद रहे। ऑपरेटरों ने 24 दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में प्रकाशित नई परिवहन नीति के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई। खासकर परिचालक सीट पर टैक्स और सिटी बसों को शहरी सीमा से बाहर संचालित करने के प्रावधान का विरोध जोरदार रहा।
56 जिलों का समर्थन, सरकार पर दबाव
बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष पांडे ने बताया कि संयुक्त आह्वान पर 2 मार्च से हड़ताल की घोषणा की गई थी, जिसे प्रदेश के 56 जिला बस एसोसिएशनों का समर्थन मिला था। हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने तेजी दिखाई। पहले दौर की चर्चा भोपाल के एक होटल में हुई, जहां मध्यप्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन और प्राइम रूट बस ओनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने विस्तार से अपनी बात रखी।
परमिट और टैक्स पर सबसे ज्यादा नाराजगी
ऑपरेटरों का कहना था कि स्थायी और अस्थायी परमिट जारी न होने से पहले ही कारोबार प्रभावित है। ऊपर से नए टैक्स और रूट संबंधी नियमों ने स्थिति और मुश्किल कर दी। बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि बिना जमीनी हालात समझे फैसले लागू कर दिए गए, जिससे छोटे और मध्यम बस मालिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा।
सरकार का फैसला: राजपत्र रद्द, कमेटी गठित
सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के राजपत्रों को तत्काल रद्द करने की घोषणा की। साथ ही एक नई कमेटी बनाकर विस्तृत चर्चा के बाद ही अगला निर्णय लेने की बात कही। इस फैसले को ऑपरेटरों ने सकारात्मक कदम बताया और 2 मार्च से प्रस्तावित हड़ताल निरस्त कर दी।
यात्रियों को राहत
अगर हड़ताल होती तो प्रदेश में हजारों बसें सड़कों से गायब हो जातीं, जिसका सीधा असर आम यात्रियों, छात्रों और रोजाना सफर करने वालों पर पड़ता। फिलहाल स्थिति सामान्य है, बसें तय समय पर चलेंगी। हालांकि ऑपरेटरों ने साफ किया है कि कमेटी की बैठक और ठोस समाधान का इंतजार रहेगा। अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे की रणनीति फिर बनाई जाएगी। फिलहाल, सरकार और ऑपरेटरों के बीच टकराव टल गया है। लेकिन यह भी साफ है कि परिवहन नीति पर असहमति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।