मध्यप्रदेश में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्तियां इसी सप्ताह हो सकती हैं। सूची दिल्ली भेजी जा चुकी है, मंजूरी मिलते ही पहली सूची जारी होने की संभावना।
निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और स्थानीय स्तर की अन्य नियुक्तियों को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की लंबी प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है। मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में तैयार की गई सूची अंतिम रूप लेकर दिल्ली पहुंच चुकी है। केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी मिलते ही संभवतः इसी सप्ताह सत्ता में नियुक्तियों की पहली सूची जारी हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में लगभग चार दर्जन पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। इसके अलावा करीब 300 से 400 कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर के विभिन्न शासी निकायों में समायोजित करने की तैयारी की जा चुकी है। जिलाध्यक्षों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से तैयार की गई कार्यकर्ताओं की सूचियों पर प्रदेश संगठन स्तर पर एक-एक नाम पर दोबारा मंथन किया गया है। इसके बाद अंतिम सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। जैसे ही केंद्र से स्वीकृति मिलेगी, प्रदेश नेतृत्व नियुक्तियों की घोषणा कर देगा।
जमीनी कार्यकर्ताओं पर रहेगा फोकस
राज्य स्तर के निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में पार्टी के वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा। इनमें कुछ पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और पिछले चुनाव में टिकट से वंचित रहे दावेदारों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।वहीं संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को स्थानीय नगरीय निकायों में वरिष्ठ पार्षद, महाविद्यालयों की जनभागीदारी समितियों और अन्य स्थानीय शासी संस्थाओं में जिम्मेदारियां देने की तैयारी है।
15 मार्च तक घोषित होंगी मोर्चों की कार्यकारिणी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खडिलवाल ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के सभी मोर्चों की प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी अगले 10 दिनों में, यानी लगभग 15 मार्च तक घोषित कर दी जाएंगी। इन कार्यकारिणियों में कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को अवसर मिलने की संभावना है। इसके बाद जनभागीदारी समितियों और वरिष्ठ पार्षदों की सूचियां भी जारी की जाएंगी।
मंत्रिमंडल विस्तार तय, फिलहाल टला
केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश और प्रदेश संगठन के समन्वय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी समय में मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। विस्तार के दौरान कुछ मंत्रियों और राज्यमंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है।सूत्रों के मुताबिक, जिन मंत्रियों के पास दो या उससे अधिक प्रमुख विभाग हैं, उनसे एक-दो महत्वपूर्ण विभाग लेकर अन्य मंत्रियों को सौंपे जा सकते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री के पास मौजूद कुछ विभाग भी मंत्रियों के बीच बांटे जाने की संभावना है, ताकि अधिक संतुलित जिम्मेदारी तय हो सके।इसके अलावा मोर्चा संगठनों की जिला स्तरीय इकाइयों का गठन भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को संगठन में जिम्मेदारी मिल सके।