मध्य प्रदेश विधानसभा में सिंगरौली की पेड़ कटाई और अदानी खदान को लेकर तीखी बहस। बीजेपी विधायक ने नुकसान से इनकार किया, कांग्रेस ने सरकार पर उद्योगपतियों को खुली छूट देने का आरोप लगाया।
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आठवां दिन, और सदन में आवाजें कुछ ज्यादा ही ऊंची सुनाई दीं। मुद्दा था सिंगरौली में कोल माइंस के लिए हो रही पेड़ कटाई। भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने साफ कहा पेड़ कटाई से सिंगरौली का एक पैसे का नुकसान नहीं होगा। बस, यहीं से माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष विकास की बात कर रहा था, तो विपक्ष पर्यावरण और उद्योगपतियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा था।
कोयला नहीं तो बिजली नहीं- रामनिवास शाह
सिंगरौली से जुड़े इस मामले में भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने तर्क दिया कि कोल माइंस के लिए पेड़ काटना जरूरी है। उनका कहना था, बिना कोयले के बिजली संभव नहीं, और बिना बिजली के पानी भी नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली मुद्दा पेड़ कटाई नहीं, बल्कि विस्थापन और मुआवजे का है। उन्होंने कहा सिंगरौली का नुकसान नहीं हो रहा, चर्चा मुआवजे पर होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि खदानें किसी एक कंपनी को सीधे नहीं दी जातीं, बल्कि नीलामी प्रक्रिया से मिलती हैं। अदानी के अलावा एस्सार, जेपी और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड जैसी कंपनियां भी वहां काम कर रही हैं।
कांग्रेस का पलटवार: अडानी को खुली छूट
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल का कहना था कि सरकार ने Adani Group को पेड़ कटाई और पहाड़ खोदने की खुली छूट दे दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पर्यावरणीय नुकसान का आकलन ठीक से किया गया है और स्थानीय लोगों की राय ली गई है या नहीं। सदन में कुछ देर के लिए शोर भी हुआ, बीच-बीच में टोका-टाकी, और अध्यक्ष को दखल देना पड़ा।
जहां उद्योग होगा, वहां प्रदूषण होगा
रामनिवास शाह ने यह भी कहा कि जहां उद्योग होगा, वहां कुछ हद तक प्रदूषण तो होगा ही, लेकिन सरकार रोकथाम के उपाय कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। सिंगरौली लंबे समय से कोयला और बिजली उत्पादन का बड़ा केंद्र रहा है, लेकिन साथ ही प्रदूषण की शिकायतें भी उठती रही हैं। विधायक ने खुद को वहीं का निवासी बताते हुए कहा कि असली समस्या जमीन और विस्थापन की है, जिस पर काम चल रहा है।
कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने कहा कि किसान रात में टॉर्च लेकर खेतों में गोवंश को भगाने के लिए मजबूर हैं। फसलें बर्बाद हो रही हैं, सड़कें जाम हो रही हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार की ठोस योजना क्या है। पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने जवाब दिया कि 25 जिलों में गौशालाओं के लिए जमीन चिन्हित की गई है। कई जगह टेंडर भी जारी हो चुके हैं। एक स्थान पर कम से कम 5000 गोवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि लगभग 10 लाख निराश्रित गोवंश प्रदेश में हैं, जिनमें से 4 लाख को नई व्यवस्था में समायोजित किया जा सकेगा।
फायर सेफ्टी कानून की मांग
जबलपुर उत्तर-पूर्व से भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे ने प्रदेश में बढ़ती आगजनी की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने नियमित फायर ऑडिट और कड़े फायर सेफ्टी कानून की मांग की। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि केंद्र के मॉडल फायर एक्ट के आधार पर राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है, और अगले तीन महीनों में निर्णय की स्थिति बन सकती है।
सदन में सहारा इंडिया में फंसे निवेशकों की राशि, पत्रकार सुरक्षा कानून और महिला व ओबीसी आयोग के गठन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा गया। मंत्रीगण ने कहा कि कई मामलों में अध्ययन और प्रक्रिया जारी है, और कुछ मुद्दे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाए जा रहे हैं।