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स्व का बोध ही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति है: सुरेश सोनी

स्व का बोध ही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति है: सुरेश सोनी

भाषा, संस्कृति और राष्ट्रबोध के संगम बने मातृभाषा समारोह का समापन


स्व का बोध ही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति है सुरेश सोनी

भोपाल। स्व का बोध ही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति है। यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी का। वे मातृभाषा मंच द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मातृभाषा समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के महत्व को समझने के लिए किसी भाषण की आवश्यकता नहीं होती, यह अनुभव का विषय है, जिसे यहाँ लगी प्रदर्शनियों के माध्यम से भली-भांति समझा जा सकता है। इनका मूल स्वर यही है कि भारत एक है और भारतीय समाज एक है

इससे पूर्व उन्होंने कहा कि मातृभाषा मंच विगत आठ वर्षों से समाज-जागरण के लक्ष्य को केंद्र में रखकर कार्य कर रहा है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष है। जैसे शंकराचार्य जैसे महान आत्मज्ञानी सभी जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों में एक ही परमात्मा का दर्शन करते हैं, उसी प्रकार भारत के गाँवों में रहने वाला एक सामान्य नागरिक भी यह समझता है कि भगवान एक हैं, उनके रूप अनेक हैं। विभिन्न पूजा-पद्धतियाँ, अनेक भाषाएँ और अनेक पंथ होने के बावजूद भारतीय समाज एक है। भारत में इतिहास के दौरान प्रांत, भाषा और पंथ के कारण आक्रमण हुए। भविष्य में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न न हों, इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मातृभाषा मंच के माध्यम से सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है।


उन्होंने कहा कि जब अंग्रेजों का आक्रमण हुआ, तब उनसे संघर्ष के लिए अनेक क्रांतिकारी सामने आए, परंतु सम्पूर्ण समाज क्रांतिवीर नहीं बन सकता था। तब एक ऐसी धारा विकसित हुई, जिसकी शुरुआत महात्मा गांधी जी के स्वावलंबन के विचार से हुई। इससे समाज का व्यापक वर्ग जुड़ा और स्व का बोध जागृत हुआ। यही राष्ट्र निर्माण की मूल शक्ति है। इस अवसर पर बंसल ग्रुप के एमडी सुनील बंसल तथा मातृभाषा मंच के संयोजक अमिताभ सक्सेना मंचासीन थे। समापन सत्र में संघ के शताब्दी वर्ष पर केंद्रित “राष्ट्र सर्वोपरि” विषयक भव्य प्रस्तुति मोहित सेवानी एवं उनके समूह द्वारा दी गई, जिसने दर्शकों के मन में राष्ट्र प्रथम और देशभक्ति की भावना को आलोकित कर दिया।

प्रातःकालीन कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के शौर्य का प्रदर्शन किया गया। समारोह के अंतर्गत भगवान झूलेलाल की जीवनी पर आधारित अत्यंत सुंदर एवं भक्ति-भावपूर्ण नृत्य-नाटिका का मंचन किया गया, जिसकी निर्देशिका श्रीमती कविता इसरानी थीं। नृत्य-नाटिका में 16 कलाकारों ने सहभागिता की। सायंकालीन कार्यक्रम में धर्म और भक्ति का संदेश दिया गया। नाटिका के माध्यम से भगवान झूलेलाल के जीवन के संघर्षों एवं उपदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात भगवान बिरसा मुंडा के यशस्वी जीवन पर आधारित प्रेरणादायक एवं जानकारीवर्धक नाटक का मंचन किया गया।


कार्यक्रम में संत रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उनकी महिमा, ख्याति एवं भक्ति-पूर्ण जीवनगाथा को चलचित्र के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें संत रविदास जी की भक्ति यात्रा, भगवान के प्रति अपार श्रद्धा, जन-जन में और कण-कण में ईश्वर के अनुभव तथा सदाचरण का सुंदर चित्रण किया गया। इसके बाद राम जन्मभूमि के भव्य निर्माण, संघर्ष, आरंभ, चुनौतियों और विजय यात्रा पर आधारित चलचित्र ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही पर्यावरण, स्वच्छता, महिला स्वास्थ्य (पैड) और जंगलों के प्रति सेवा-भाव को भी दर्शाया गया। मिशनरियों के विरुद्ध जीवनपर्यंत संघर्ष को भी प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया। विवेक त्रिपाठी के निर्देशन में तैयार इस नाटक को 12 रंगमंच कलाकारों ने सजीव अभिनय के माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। 

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