मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नागलवाड़ी में कृषि कैबिनेट की पहली बैठक में 16 योजनाओं पर करीब 28 हजार करोड़ खर्च को मंजूरी। निमाड़ के 7 जिलों पर खास फोकस।
बड़वानी । मध्यप्रदेश की राजनीति में सोमवार का दिन अलग ही रंग लेकर आया। निमाड़ की धरती से सरकार ने ऐलान किया कि 16 कृषि योजनाओं पर करीब 28 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। कृषि कैबिनेट की इस पहली बैठक ने संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में खेती और सिंचाई राज्य की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी मंत्रिमंडल टीम के साथ नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भीलटदेव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और फिर कृषि कैबिनेट बैठक में हिस्सा लिया। मंत्रियों के साथ कुछ यादगार तस्वीरें भी वहीं क्लिक हुईं, जैसे कि एक अनोखा दिन था।

भीलटदेव के दर्शन के साथ शुरू हुआ दिन
सीएम डॉ. Mohan Yadav और बाकी मंत्री सुबह के वक्त नागलवाड़ी स्थित प्राचीन भीलटदेव मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के प्रांगण में पूजा-अर्चना की गयी, मंत्रोच्चारण के बीच कुछ मंत्रियों के साथ ग्रुप फोटो भी बनवाया गया। पूजा को एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शुरुआत बताया गया, इससे पहले वे कृषि बैठक की ओर बढ़े। नागलवाड़ी गांव, जो जनजातीय बहुल क्षेत्र है, भिलटदेव जैसे लोकदेवता के कारण आदिवासी समाज के लिए खास महत्त्व रखता है। इसीलिए सरकार ने इसे कृषि कैबिनेट के आयोजन स्थल के रूप में चुना। कैबिनेट से पहले सीएम मंत्रिमंडल के साथ सामूहिक फोटो भी कराया गया।
किसानों के हित में ऐतिहासिक बैठक
यह बैठक ‘किसान कल्याण वर्ष–2026’ के तहत आयोजित की गयी है और इसे मध्य प्रदेश सरकार की एक पहली पहल के रूप में देखा जा रहा है, बैठक में सबसे अहम मंजूरी वरला-पानसेमल सिंचाई परियोजना को मिली। लंबे समय से लंबित इस योजना से निमाड़ अंचल के किसानों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि परियोजना पूरी होने पर हजारों हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। क्षेत्र के किसान, जो अब तक बारिश पर निर्भर थे, उन्हें स्थायी जल स्रोत मिल सकेगा। कृषि कैबिनेट में निमाड़ क्षेत्र के सात जिलों को प्राथमिकता देने की रणनीति सामने आई। इन जिलों में सिंचाई, भंडारण, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की योजनाएं शामिल हैं। बताया गया कि सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि कृषि प्रसंस्करण और मार्केटिंग ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। यानी किसान को खेत से बाजार तक सहूलियत मिले, यह कोशिश है।

करीब 28 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान कम नहीं है। लेकिन सवाल यही है कि क्या यह राशि ज़मीन पर उतरेगी? प्रदेश में पहले भी कई योजनाएं घोषित हुईं, कुछ सफल रहीं, कुछ कागजों में ही अटकी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर परियोजनाओं की निगरानी मजबूत रही और समयबद्ध क्रियान्वयन हुआ, तो निमाड़ क्षेत्र में कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
शिखरधाम परिसर में भीलटदेव मंदिर की तलहटी में 8 एकड़ के गार्डन को अस्थायी ‘मंत्रालय’ के रूप में सजाया गया था। यहां कृषि आधारित प्रदर्शनी, ग्रीन रूम और विशेष कैबिनेट हॉल की व्यवस्था की गयी थी, साथ ही ग्रामीण और कृषि समुदाय के मुद्दों को झलक दिखाने वाली प्रदर्शनी भी थी। कार्यक्रम स्थल पर निमाड़ क्षेत्र की संस्कृति की छाप भी साफ दिखी। ढोल-मांदल, लोक वाद्ययंत्र और पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था ने माहौल को और जीवंत बनाया।