सीएम मोहन यादव बोले- मंदिर, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म से मध्य प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। उज्जैन मॉडल पर प्रमुख धार्मिक स्थल विकसित होंगे।
मध्य प्रदेश अब अपनी पहचान सिर्फ खेती या पारंपरिक उद्योगों से नहीं, बल्कि मंदिर, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म के संगम से बनाना चाहता है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने रविवार को इंदौर में कहा कि आने वाले समय में प्रदेश देवस्थानों और पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा, और यही रोजगार सृजन की नई धुरी होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर है।
“मंदिर सिर्फ श्रद्धा नहीं, अर्थव्यवस्था का आधार भी”
सीएम ने कहा कि मंदिर हमेशा से आस्था के केंद्र रहे हैं, लेकिन उनसे जुड़ा प्रबंधन, सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था और कला क्षेत्र भी हजारों लोगों को रोजगार दे सकता है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में 13 नए लोक विकसित किए जा रहे हैं। एआई और डिजिटल तकनीक को भी मंदिर प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है। आने वाले समय में मध्य प्रदेश हेल्थ टूरिज्म का भी बड़ा केंद्र बन सकता है। मुख्यमंत्री ने इंदौर एयरपोर्ट पर स्वामी यतींद्र गिरी महाराज से सौजन्य भेंट भी की।

उज्जैन मॉडल पर होंगे अन्य धार्मिक स्थल विकसित
सीएम ने कहा कि 2022 में प्रधानमंत्री Narendra Modi की यात्रा के बाद Ujjain देश का बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनकर उभरा। इसी मॉडल पर अब Omkareshwar, Orchha और Salkanpur समेत कई प्रमुख स्थलों को विकसित किया जा रहा है। उनका कहना था कि अगर व्यवस्थाएं बेहतर हों, तो श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था अपने आप मजबूत होती है।
टेंपल मैनेजमेंट के लिए अकादमिक कोर्स
सरकार ने विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर टेंपल मैनेजमेंट के लिए विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। Vikram University के माध्यम से कोर्स, डिप्लोमा और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा संचालित किए जाएंगे।इनमें मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, धार्मिक अनुष्ठान और कला को बढ़ावा देने की ट्रेनिंग दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि मंदिर प्रबंधन पेशेवर बने और युवाओं को रोजगार के नए रास्ते मिलें।

स्थानीय शिल्प को भी बढ़ावा
सीएम ने कहा कि महाकाल की फाइबर प्रतिमा हटाकर स्टोन और मेटल की प्रतिमाएं स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को काम मिल रहा है।मूर्ति शिल्प को प्रदेश में ही बढ़ावा देने की योजना है, ताकि बाहर से निर्भरता कम हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़े।