मध्य प्रदेश में 1.5 लाख से ज्यादा सेवारत शिक्षकों के लिए अक्टूबर में होने वाली पात्रता परीक्षा की 1000 रुपए फीस का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के 1.5 लाख सेवारत शिक्षकों के लिए अक्टूबर में पात्रता परीक्षा के लिए रखे गए शुल्क को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा शुल्क 1000 रुपए को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षकों ने इतने अधिक शुल्क लेने का विरोध किया है। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ और मप्र शासकीय शिक्षक संगठन इस संबंध में आयुक्त से जल्द मिलेगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश में सेवारत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी देनी है, लेकिन परीक्षा शुल्क ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए 1000 रुपए शुल्क निर्धारित किया है।
परीक्षा के दायरे में करीब 1.50 लाख शिक्षक
प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। इस हिसाब से केवल परीक्षा शुल्क के जरिए करीब 15 करोड़ रुपए जमा होने का अनुमान है। आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू होकर 9 सितंबर तक चलेगी। परीक्षा के लिए 1000 रुपए प्रति प्रश्नपत्र शुल्क निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थियों को एमपी ऑनलाइन और कियोस्क से जुड़े लगभग 200 रुपए शुल्क का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
शासन वहन करें शुल्क : शिक्षक संगठन
शिक्षक संयुक्त मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों ने परीक्षा शुल्क समाप्त कराने सरकार से बातचीत का फैसला किया है। वही आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नीलेश आर्य और शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि शिक्षक किसी नए पद पर नियुक्ति हासिल करने के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण वर्तमान सरकारी सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा देनी है। जब परीक्षा सरकार के स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कराई जा रही है, तो इसका खर्च भी शासन को ही वहन करना चाहिए। संगठन 26 अगस्त से पहले मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे।