मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नया निर्देश जारी किया है। अब किसी भी गिरफ्तारी से पहले लिखित कारण बताना अनिवार्य होगा, जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हो सके
प्रमोद दुबे
भोपाल: वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम अंतर्गत अब मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिस महानिदेशक के आदेश पर सभी पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस कमिश्नर को उपरोक्त आधार पर आदेश जारी कर दिए गए हैं कि अब किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी बिना किसी लिखित आधार के नहीं की जाएगी । अर्थात उपरोक्त व्यक्ति को लिखित में एवं सामान्य भाषा में गिरफ्तारी का ठोस एवं पर्याप्त कारण बताना होगा । क्योंकि गिरफ्तारी का कारण जानना गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का मौलिक अधिकार होता है ।
सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद लिया गया निर्णय
उपरोक्त संबंध में 2 दिवस पूर्व संपूर्ण मध्य प्रदेश के पुलिस अधीक्षकों को इस बाबत लिखित में पुलिस मुख्यालय के द्वारा सूचना जारी की गई है कि -किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से पूर्व उसकी गिरफ्तारी के विषय में जानकारी प्राप्त करना , गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति के मौलिक अधिकार से जुड़ा हुआ विषय होता है । अतः उपरोक्त संबंध में वर्ष 2025 में जारी किए गए सर्वोच्च अदालत अर्थात सुप्रीम कोर्ट के आदेश 6 नवंबर 2025 महाराष्ट्र राज्य बनाम अन्य के फैसले को मध्य प्रदेश सरकार ने लागू कर दिया है । संविधान के अनुच्छेद 22(1 )के तहत किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार उपरोक्त फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पारित किया था । उपरोक्त फैसले के बाद इस मामले में देश के सभी राज्यों को आदेश जारी कर दिए गए थे परंतु आदेश के पालन में देरी होने के कारण इनका पालन नहीं हो पा रहा था ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा
उपरोक्त क्रम में स्वदेश ने अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक देहात क्षेत्र भोपाल राजेश चंदेल से चर्चा की , उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी एवं आदेश का पालन किया जाएगा , उनके अनुसार पूर्व से ही विधि सम्मत कार्रवाई का पालन किया जाता रहा है । एवं नवीन आदेश के अनुसार जो गाइडलाइन तय की गई है , आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से पूर्व ही गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट शब्दों में लिखित में बता दिया जाएगा । ऐसा नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ।
लेखक - प्रमोद दुबे