Breaking News
  • होर्मुज बंद, फिर भी भारत को नहीं होगी तेल की कमीः सूत्रों का दावा 60% सप्लाई दूसरे रास्तों से हो रही
  • इजराइल-ईरान जंग से दक्षिण कोरिया का बाजार 7% टूटा, जापान का निक्केई 3% गिरा
  • हाथरस में यमुना एक्सप्रेस-वे पर डबल डेकर बस ने ईको वैन को पीछे टक्कर मारी 6 लोगों की मौत, 7 घायल
  • PM मोदी यूट्युब पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले दुनिया के नेता, 30 मिलियन सब्सक्राइबर हुए
  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद किया: गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की चेतावनी
  • ईरान युद्ध का असर: मुंबई में 4,500 टन प्याज के 150 कंटेनर फंसे, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश > भोपाल

MP में दिखा 2026 का पहला चंद्रग्रहण

मध्य प्रदेश में दिखा साल का पहला चंद्रग्रहण: सबसे पहले सिंगरौली, सबसे आखिर में आलीराजपुर

2026 का पहला चंद्रग्रहण मध्य प्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली और सबसे आखिर में आलीराजपुर में दिखा। जानिए क्यों लाल दिखा चांद और क्या है चंद्रग्रहण।


मध्य प्रदेश में दिखा साल का पहला चंद्रग्रहण सबसे पहले सिंगरौली सबसे आखिर में आलीराजपुर

Solar Eclipse |

भोपालः  साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार दोपहर 3:21 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहा। हालांकि भारत में चंद्रोदय के समय तक ग्रहण का अधिकांश चरण पूरा हो चुका था, फिर भी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में यह नजर आया। प्रदेश में सबसे पहले यह ग्रहण सिंगरौली में शाम 6:01 बजे दिखाई दिया, जबकि सबसे आखिर में आलीराजपुर में इसके दर्शन हुए।

पूर्वी जिलों में ग्रहण करीब 40 से 45 मिनट तक दिखा, जबकि पश्चिमी हिस्सों में इसकी अवधि लगभग 10 मिनट रही।

क्यों लाल दिखा चांद?

विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू के अनुसार, इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया (अम्ब्रा) से होकर गुजरा। पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली रोशनी को बिखेर देता है और लाल प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने देता है। इसी कारण पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है। इसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

सूतक के बाद खुले मंदिरों के पट

ग्रहण के दौरान सूतक काल लागू रहा। सूतक समाप्त होने के बाद प्रदेशभर के मंदिरों में साफ-सफाई और जल शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद मंदिरों के पट खोले गए और विधि-विधान से पूजा-पाठ की गई।

चंद्रग्रहण क्या होता है?

गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी और अन्य ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन लगते हैं, जबकि चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है और वह लगभग 27 दिन में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में होती है, तब सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और यही स्थिति चंद्रग्रहण कहलाती है। खगोलीय विज्ञान के अनुसार यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है, इसलिए अधिकतर चंद्रग्रहण पूर्णिमा को ही लगते हैं।

Related to this topic: