Breaking News
  • ICC T20 वर्ल्डकप में सबसे बड़ा उलटफेर, जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से हराया
  • उत्तर प्रदेश में 20 हजार पदों पर आउटसोर्स भर्तियां होंगी, 426 करोड़ बजट बढ़ा
  • कुबेरेश्वर में 14 फरवरी से रुद्राक्ष महोत्सव- रुद्राक्ष नहीं बंटेंगे, पहली बार 2.5 किमी का पैदल कॉरिडोर
  • विदिशा में 30 फीट गहरे तालाब में गिरी कार, 3 बारातियों की मौत 7 घायल
  • राजस्थान- शादी समारोह में एसिड पीने से 4 की मौत, मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल
  • प्रधानमंत्री ऑफिस आज सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट मीटिंग
  • टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे बड़ी जीत:, 47वीं बार 200+ स्कोर बनाया
  • बांग्लादेश चुनाव में BNP की जीत पर PM मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी
  • दिल्ली के कई स्कूलों को बम की धमकी, पुलिस ने जांच शुरू की

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

राजधानी सहित कई जिलों में लंपी संक्रमण बन रहा मौत का कारण

राजधानी सहित कई जिलों में लंपी संक्रमण बन रहा मौत का कारण

राजधानी सहित कई जिलों में लंपी संक्रमण बन रहा मौत का कारण

लंपी वायरस का कहर: टीकाकरण भी कारगर नहीं
मददगार नहीं है राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम

प्रदेश में पशुपालकों के जानवर लंपी जैसे संक्रमण में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं। गौवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाले इस संक्रमण का भोपाल सहित झाबुआ, रतलाम, बैतूल, बड़वानी, सिवनी और सागर जैसे जिलों में सबसे अधिक प्रभाव देखा गया है। वहीं, विभाग के लापरवाह रवैये के कारण पार्टुना और जबलपुर जैसे जिलों के पशुपालक भी चिंता में हैं।

संक्रमण की चपेट में आने के बाद जानवरों के दूध में कमी आई है, वहीं कई जानवर मर भी रहे हैं। बावजूद इसके, एडवायजरी जारी करने के अलावा राज्य पशुपालन विभाग द्वारा नियंत्रण के ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं। इस कड़ी में लंपी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं निगरानी के लिए स्थापित राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम भी मदद नहीं कर पा रहा है। अधिकृत दूरभाष नंबर 0755-2767583 लगातार व्यस्त रहने के कारण प्रदेश के पशुपालकों ने इसे अनुपयोगी माना है।

टीकाकरण और सजगता से संक्रमित पशु दो-तीन सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन दूध उत्पादकता में कमी कई सप्ताह तक बनी रहती है, जिसका खामियाजा पशुपालकों को भुगतना पड़ता है।

डॉ. पीएस पटेल, संचालक पशुपालन एवं डेयरी का कहना:

“पहले यह संक्रमण गंभीर था, अब यह नियंत्रण में है। संदिग्ध क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को तेज किया गया है।”

संक्रमण के लक्षण और फैलाव

रोग की शुरूआत में हल्का बुखार दो-तीन दिन के लिए रहता है। इसके बाद पूरे शरीर की चमड़ी में गठानें निकल आती हैं। ये गठानें गोल और उभरी हुई आकृति की होती हैं। बीमारी के लक्षण मुंह, गले और श्वासनली तक फैल जाते हैं, साथ ही पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी मृत्यु भी हो जाती है। यह रोग मच्छर, काटने वाली मक्खी और कील जैसी कीटों से एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलता है।

1.87 करोड़ पशुओं में सिर्फ 41.5 लाख का टीकाकरण

प्रदेश में 1 करोड़ 87 लाख गौवंश है, लेकिन विभाग द्वारा केवल 41.5 लाख पशुओं में ही एलएसडी रोग का टीकाकरण किया गया है। इससे संक्रमण बढ़ रहा है और पशुओं की मौत का कारण बन रहा है।

जबलपुर और पांढुर्णा में हो रही मौतें

जबलपुर नगर निगम की गोशाला में गुरुवार को 8 गोवंश मृत पाए गए। गोशाला प्रभारी ने इसके लिए लंपी वायरस को जिम्मेदार ठहराया। वहीं पांढुर्णा जिले में भी 15 से अधिक गोवंश की मौतें हुई हैं। छिंदवाड़ा प्रयोगशाला ने मृत गोवंश में पॉजिटिव वर्गाकार बैक्टीरिया मिलने का दावा किया है। बताया गया है कि गांव में संक्रमित दूध पीने से दो बच्चों समेत पांच लोग बीमार भी हुए हैं।

Related to this topic: