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Lenskart Bhopal Row: Tilak-Kalawa Protest Erupts

भोपाल में लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन, तिलक-कलावा विवाद पर हिंदू संगठनों ने कर्मचारियों को तिलक लगाया

भोपाल में लेंसकार्ट शोरूम के बाहर तिलक-कलावा विवाद पर विरोध प्रदर्शन। हिंदू संगठनों ने बहिष्कार की चेतावनी दी, कंपनी ने सभी धर्मों के सम्मान की बात कही।


भोपाल में लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन तिलक-कलावा विवाद पर हिंदू संगठनों ने कर्मचारियों को तिलक लगाया

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा स्थित Lenskart शोरूम के बाहर ड्रेस कोड विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर विरोध जताया।

‘सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी की कथित गाइडलाइन में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने की बात कही गई है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि यह सनातन परंपराओं का अपमान है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कंपनी के उत्पादों के बहिष्कार की भी चेतावनी दी।

संत समिति ने भी जताया विरोध

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष अनिल आनंद महाराज ने कहा कि यदि किसी गाइडलाइन में सिंदूर, कलावा या अन्य धार्मिक प्रतीकों पर रोक की बात है, तो यह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि भारत में धार्मिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी कॉरपोरेट संस्था को इस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।

कर्मचारियों ने आरोपों को किया खारिज

विवाद के बीच शोरूम के कर्मचारियों ने अलग दावा किया है। एक कर्मचारी के अनुसार, उन्हें कभी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उन्होंने बताया कि वे नवरात्रि जैसे अवसरों पर पारंपरिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं और कंपनी की ओर से ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई।

सोशल मीडिया से बढ़ा विवाद

पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी दस्तावेज और ‘ग्रूमिंग गाइड’ से शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया कि कुछ धार्मिक प्रतीकों पर रोक है, जबकि अन्य को शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इस कथित भेदभाव को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

कंपनी की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद Piyush Bansal ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है और कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। 

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