Breaking News
  • भारत की लगातार दूसरी जीत, इटली पहली बार जीता, श्रीलंका 105 रन से नेपाल को हराया
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश > इन्दौर

मप्र की धरती से निकली एक और तूफानी गेंदबाज

मप्र की धरती से निकली एक और तूफानी गेंदबाज

मप्र की धरती से निकली एक और तूफानी गेंदबाज

अनुराग तागड़े, इंदौर। क्रांति नाम है उसका-और उसने सच में भारतीय महिला क्रिकेट में एक क्रांति ला दी है। क्रांति ने भारत बनाम इंग्लैंड मैच में छह विकेट लेकर सभी को चौंका दिया है। यह प्रदर्शन केवल एक जीत नहीं थी, यह उन तमाम लड़कियों की उम्मीद थी जो मध्यप्रदेश के कस्बों, गांवों और छोटे शहरों में तेज गेंदबाज बनने का सपना देखती हैं।

क्रांति का प्रदर्शन बताता है कि भारतीय महिला क्रिकेट अब सिर्फ स्पिन पर निर्भर नहीं है। क्रांति जैसी तेज गेंदबाज 115 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल रही हैं, स्विंग और यॉर्कर से विदेशी बल्लेबाजों को चौंका रही हैं। यह रफ्तार, यह हौसला, यह बदलाव दर्शाता है कि भारतीय महिला क्रिकेट अब नई दिशा में जा रहा है।

पूजा वस्त्राकर के बाद अब क्रांति : मध्यप्रदेश की धरती ने पहले पूजा वस्त्राकर जैसी शानदार ऑलराउंडर को भारतीय टीम को दिया और अब एक और तेज गेंदबाज ने दुनिया को अपनी रफ्तार और स्विंग से चौंका दिया है। छिंदवाड़ा के पास छोटे कस्बे में रहने वाली क्रांति परिवार में क्रिकेट का कोई इतिहास नहीं था, लेकिन सबसे बड़े भाई मयंक सिंह ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उसे आगे बढ़ने में हरसंभव सहयोग दिया। खेतों में काम करने वाले पिता ने अपनी सीमित आमदनी के बावजूद उसे क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया। मां एक गृहिणी थीं, लेकिन उन्होंने भी बेटी के सपनों को कभी नहीं रोका। क्रांति ने 14 साल की उम्र तक टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला, लेकिन जब उन्होंने पहली बार लेदर बॉल से गेंदबाजी की, तो कोच भी उनकी तेजी देखकर चौंक गए।

बिना जूते, बिना किट की शुरुआत: क्रांति के शुरुआती दिन संघर्ष से भरे थे। न जूते थे, न क्रिकेट किट। लेकिन दिल में आग थी। स्थानीय कोच ने जब उसकी गेंदबाजी देखी, तो कहा - 'तू सिर्फ तेज नहीं है, तू अलग है।' वहीं से शुरू हुआ एक लंबा सफर-जिला स्तर से राज्य, फिर एनसीए (नेशनल क्रिकेट अकेडमी) और अब भारतीय टीम।

मध्यप्रदेश : महिला तेज गेंदबाजों की नई प्रयोगशाला

क्रांति का आना यह साबित करता है कि मध्यप्रदेश अब तेज गेंदबाज़ी का गढ़ बन रहा है। पूजा वस्त्राकर और अब क्रांति गौड़ - ये नाम सिर्फ खिलाड़ी नहीं हैं, ये रोल मॉडल हैं। इन्होंने यह दिखा दिया कि यदि प्रतिभा है, मेहनत है, और थोड़ा मार्गदर्शन मिल जाए, तो कोई भी लड़की गांव से निकलकर देश का नाम रोशन कर सकती है। 

Related to this topic: