आबकारी मामले में बरी होने के बाद जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल का शक्ति प्रदर्शन। सिसोदिया ने पीएम बनाने का आह्वान किया, आप नेताओं का भाजपा पर तीखा हमला।
नई दिल्ली। आबकारी मामले में अदालत से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी ने बड़ी जनसभा जंतर-मंतर पर की। मंच पर आते ही अरविंद केजरीवाल ने हाथ हिलाया, भीड़ ने जवाब दिया सच की जीत हुई। यह महज़ एक सभा नहीं थी, बल्कि राजनीतिक संदेश भी था।
कोर्ट से राहत के बाद सीधा जनता के बीच
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी मामले में Arvind Kejriwal, Manish Sisodia समेत 23 आरोपियों को बरी किया है। फैसले के बाद पार्टी ने जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन किया। मंच से केजरीवाल ने कहा उन्होंने हमें बदनाम करने की कोशिश की। लेकिन हम ईमानदार थे, हैं और रहेंगे। भीड़ में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और वे कर्मचारी भी दिखे जिन्हें हाल में नौकरी से हटाया गया था — बस मार्शल, चालक, कंडक्टर और मोहल्ला क्लीनिक के कुछ डॉक्टर-नर्स भी पहुंचे।
आतिशी और गोपाल राय का हमला
सभा की शुरुआत में Atishi Marlena और Gopal Rai ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला। गोपाल राय ने अदालत का धन्यवाद करते हुए कहा कि भाजपा चाहे जितनी कोशिश कर ले, केजरीवाल की छवि खराब नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, सच्चाई को देर लग सकती है, लेकिन जीत उसी की होती है।
देश स्तर पर संघर्ष करना होगा- सिसोदिया
सभा में Manish Sisodia ने कार्यकर्ताओं से बड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस जंतर-मंतर से पार्टी की शुरुआत हुई थी, वहीं से अब राष्ट्रीय राजनीति की नई लड़ाई शुरू होगी। सिसोदिया ने कहा कि अगर केजरीवाल को देश स्तर पर आगे बढ़ाना है, तो ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से टकराने की तैयारी रखनी होगी। उनका बयान साफ संकेत था कि पार्टी अब रक्षात्मक नहीं, आक्रामक रणनीति अपनाएगी।
पंजाब से भी समर्थन
पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं, राजनीतिक सच्चाई की जीत है। उनके संदेश के दौरान भीड़ ने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए। आबकारी मामले में राहत मिलने के बाद आप इसे नैतिक जीत के तौर पर पेश कर रही है। वहीं भाजपा की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह रैली आने वाले चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। जंतर-मंतर की जमीन, जहां कई आंदोलनों ने जन्म लिया, अब फिर एक बड़े राजनीतिक विमर्श का मंच बनती दिख रही है। भीड़ छंटने लगी तो भी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर उत्साह साफ था। सवाल अब यह है कि अदालत की राहत को आप कितना बड़ा जनसमर्थन में बदल पाती है।