कानपुर में अस्पताल की लापरवाही से युवक को मृत घोषित कर दिया गया। पांच महीने तक दस्तावेज निरस्त रहे, शिकायत के बाद आधार अपडेट कर रिकॉर्ड सुधारा गया।
कानपुरः उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। यहां एक युवक को जिंदा रहते हुए कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल से जारी डेथ सर्टिफिकेट के बाद उसका नाम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों से कट गया। करीब पांच महीने की भागदौड़ के बाद आखिरकार वह फिर से सरकारी रिकॉर्ड में ‘जिंदा’ हो सका।
कैसे जिंदा युवक बन गया कागजों में ‘मुर्दा’
गोविंद नगर के निराला नगर निवासी गौरव साहू सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं। वे लावारिस मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने और अंतिम संस्कार कराने का काम करते हैं। 7 सितंबर 2025 को उन्होंने एक लावारिस मरीज को मुरारीलाल चेस्ट अस्पताल में भर्ती कराया। 12 सितंबर को मरीज की मौत हो गई, लेकिन कागजी गड़बड़ी में गौरव का आधार नंबर दर्ज हो गया और उन्हें ही मृत घोषित कर दिया गया।
राशन लेने पहुंचे तो खुला राज
जनवरी 2026 में जब गौरव सरकारी राशन लेने पहुंचे तो पता चला कि उनका नाम सूची से हटा दिया गया है। बैंक खाता भी ब्लॉक मिला। जांच करने पर आधार कार्ड इनवैलिड मिला, जिसके कारण पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी निरस्त हो चुके थे। तब उन्हें जानकारी हुई कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाया गया है।
खुद को जिंदा साबित करने की जंग
गौरव ने संबंधित विभागों के चक्कर लगाए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत दी। अस्पताल प्रशासन ने पहले जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन शिकायत के बाद मामले की जांच हुई। डेथ सर्टिफिकेट जारी करने वाले कर्मचारी को हटा दिया गया। 23 फरवरी को कैंसिलेशन प्रक्रिया शुरू हुई और आधार कार्ड का बायोमेट्रिक अपडेट होने के बाद रिकॉर्ड सुधारा गया।
शिकायत पत्र में क्या लिखा
गौरव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि अस्पताल की लापरवाही से उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जिससे वे सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित हो गए। उन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्त करने और लिखित प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की थी।
पहले भी हो चुकी है ऐसी गलती
कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज से जुड़े हैलट अस्पताल में भी हाल ही में एक जीवित मरीज को मृत मानकर पोस्टमार्टम की तैयारी कर दी गई थी। बाद में पता चला कि मौत दूसरे मरीज की हुई थी। इस मामले में लापरवाही सामने आने पर कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी।