कानपुर में आईटीबीपी जवान मां का कटा हाथ बॉक्स में लेकर कमिश्नरेट पहुंच गया। जवान ने निजी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद जांच शुरू हो गई है।
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की पुलिस कमिश्नरेट में ऐसा मामला सामने आया जिससे अफरा-तफरी मच गई। जब आईटीबीपी का एक जवान बॉक्स में अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर अधिकारियों के सामने पहुंच गया। बॉक्स खुलते ही वहां मौजूद पुलिसकर्मी और फरियादी सन्न रह गए। जवान का आरोप है कि एक निजी अस्पताल की लापरवाही ने उसकी मां को जिंदगीभर का दर्द दे दिया।
मामला सिर्फ एक मेडिकल गलती का नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर रहा है जहां पीड़ित कार्रवाई के लिए दर-दर भटकता रहा। जवान का कहना है कि शिकायत के बावजूद न पुलिस ने सुनवाई की और न ही स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कोई कदम उठाया। घटना के सामने आने के बाद कानपुर प्रशासन हरकत में आया है। अब पूरे मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की विशेष टीम बनाई गई है।
सांस की तकलीफ से शुरू हुई दर्दनाक कहानी
फतेहपुर जिले के खागा हाथगाम निवासी विकास सिंह आईटीबीपी में तैनात हैं। वर्तमान में वे कानपुर के महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में सेवाएं दे रहे हैं। विकास के मुताबिक, 13 मई को उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें गंभीर सांस की दिक्कत होने लगी। परिवार एम्बुलेंस से इलाज के लिए निकला, लेकिन रास्ते में जाम लग गया। मां की हालत तेजी से खराब होती देख विकास उन्हें तत्काल टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सपोर्ट दिया और हाथ में वीगो लगाया, जिसके बाद कुछ देर के लिए हालत स्थिर हुई। लेकिन अगले ही दिन हालात पूरी तरह बदल गए।
एक इंजेक्शन के बाद हाथ में फैल गया जहर
14 मई को विकास अपनी मां को बेहतर इलाज के लिए पारस हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने देखा कि जिस हाथ में वीगो लगाया गया था, वहां सूजन और कालापन तेजी से बढ़ रहा है। जांच के बाद डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि गलत तरीके से वीगो लगाने के कारण हाथ में गंभीर संक्रमण फैल चुका है। संक्रमण गैंग्रीन में बदल गया था और शरीर में जहर फैलने का खतरा पैदा हो गया था। डॉक्टरों ने साफ कहा कि अगर हाथ नहीं काटा गया, तो महिला की जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद 17 मई को मजबूरी में महिला का हाथ काटना पड़ा।
कटे हाथ को लेकर थानों के चक्कर लगाता रहा जवान
मां का हाथ कटने के बाद विकास सिंह सीधे न्याय की लड़ाई में उतर गए। उनका आरोप है कि उन्होंने कटे हुए हाथ को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा और स्थानीय थानों से लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने अपने वरिष्ठ आईटीबीपी अधिकारियों से अनुमति ली और मां का कटा हाथ बॉक्स में रखकर सीधे कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी हैरान रह गए। घटना ने सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सुरक्षाबल का जवान जब अपनी शिकायत लेकर इस हाल में भटकता है, तो आम लोगों की स्थिति कैसी होगी, इस पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
अब डॉक्टरों की टीम करेगी जांच
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजा है। स्टाफ अफसर अमरनाथ यादव के मुताबिक, पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय वरिष्ठ डॉक्टरों की कमेटी बनाई गई है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि वीगो लगाने में लापरवाही हुई या नहीं और संक्रमण किस वजह से इतना बढ़ा। रिपोर्ट आने के बाद दोषी अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है। फिलहाल यह मामला सिर्फ मेडिकल नेग्लिजेंस का नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।