अली खामेनेई की पारिवारिक जड़ें यूपी के बाराबंकी से जुड़ी बताई जाती हैं। 1979 की क्रांति से सुप्रीम लीडर बनने तक का सफर और जंग के बीच फिर चर्चा में भारत कनेक्शन।
लखनऊ। मिडिल-ईस्ट में तनाव चरम पर है। इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए हैं। उनके मरने की खबर ने भू-राजनीति को हिला दिया है। जवाब में ईरान की ओर से भी सैन्य कार्रवाई की बातें सामने आईं। इसी बीच भारत में, खासकर उत्तर प्रदेश में एक पुरानी कहानी फिर से चर्चा में है जो है खामेनेई का यूपी से कनेक्शन।
कहा जाता है कि उनकी पारिवारिक जड़ें उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से जुड़ी हैं। इतिहास, प्रवास और सत्ता तीनों को जोड़ती यह कहानी अब फिर सुर्खियों में है।
बाराबंकी के किनटूर से शुरू होती दास्तान
बताया जाता है कि खामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी का जन्म उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किनटूर गांव के पास हुआ था। स्थानीय लोग उन्हें ‘हिंदुस्तानी मुल्ला’ के नाम से जानते थे। 19वीं सदी में वह भारत से इराक और फिर ईरान चले गए। धीरे-धीरे परिवार ने वहीं स्थायी रूप से डेरा डाल लिया। धार्मिक शिक्षा और प्रभाव के कारण इस परिवार की पहचान मजबूत होती गई।
किनटूर इलाके में आज भी बुजुर्गों के बीच इस वंश से जुड़ी बातें सुनने को मिलती हैं। हालांकि दस्तावेजी प्रमाण सीमित हैं, लेकिन लोककथाएं अब भी जिंदा हैं।
1979 की क्रांति और बदला हुआ ईरान
ईरान की राजनीति का निर्णायक मोड़ 1979 की इस्लामिक क्रांति थी। इस आंदोलन की अगुवाई Ruhollah Khomeini ने की थी, जिन्होंने शाह के राजतंत्र को हटाकर धार्मिक नेतृत्व आधारित व्यवस्था स्थापित की। इसी व्यवस्था में ‘सुप्रीम लीडर’ का पद सबसे ऊपर माना जाता है। 1981 में खामेनेई राष्ट्रपति बने और 1989 में खुमैनी के निधन के बाद उन्हें सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारी मिली।
राष्ट्रपति से सुप्रीम लीडर तक
राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कठिन दौर देखा। इसमें युद्ध, प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय दबाव शामिल है। सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान की रक्षा नीति को आक्रामक रूप देने, मिसाइल कार्यक्रम को विस्तार देने और पश्चिमी देशों के दबाव का सामना करने की रणनीति पर जोर दिया गया।
जंग के बीच फिर चर्चा में भारत कनेक्शन
इजराइल-अमेरिका हमलों और क्षेत्रीय तनाव के बीच अब यह ‘यूपी कनेक्शन’ फिर सुर्खियों में है। बाराबंकी से लेकर तेहरान तक की यह यात्रा सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि प्रवास और इतिहास की परतों को भी सामने लाती है। मध्य-पूर्व की उथल-पुथल के बीच यह किस्सा लोगों को चौंकाता जरूर है कि कभी उत्तर प्रदेश के एक गांव से जुड़ा नाम आगे चलकर ईरान की सर्वोच्च सत्ता का प्रतीक बन गया।
फिलहाल दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिकी हैं। लेकिन बाराबंकी के किनटूर में लोग अपने गांव का नाम वैश्विक खबरों में सुनकर हैरान भी हैं और कुछ हद तक गर्व भी महसूस कर रहे हैं।