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UP Industries Hit by Iran-Israel War

ईरान-इजराइल जंग की चिंगारी से यूपी में मोम संकट, लघु उद्योगों पर मंडराया ठप होने का खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध के कारण मोम के आयात पर असर पड़ा है, जिससे यूपी के लघु और मध्यम उद्योग संकट में हैं। दवा, प्लाईबोर्ड और मोमबत्ती उद्योग पर सीधा प्रभाव, उद्यमियों ने जताई चिंता।


ईरान-इजराइल जंग की चिंगारी से यूपी में मोम संकट लघु उद्योगों पर मंडराया ठप होने का खतरा

लखनऊः मध्य पूर्व में भड़की आग अब हजारों किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इलाकों तक महसूस की जा रही है। ईरान-इजराइल के बीच गहराते सैन्य टकराव का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों के छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चिंता मोम की आपूर्ति को लेकर है, जो अचानक थम सी गई है।

लखनऊ के उद्यमियों का कहना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो कई इकाइयों में उत्पादन रुक सकता है।

मोम की कमी से बढ़ी बेचैनी

ऐशबाग के मोम कारोबारी मोहित गोयल बताते हैं कि शहर में रोज करीब 40 से 50 टन मोम की खपत होती है। इसमें बड़ी हिस्सेदारी ईरान से आने वाले आयात की रही है। युद्ध की वजह से यह आपूर्ति लगभग बंद हो चुकी है। 

मोम सिर्फ मोमबत्ती तक सीमित नहीं है। कई दवाओं की कोटिंग और बेस तैयार करने में इसका इस्तेमाल होता है। प्लाईबोर्ड और तिरपाल उद्योग में वाटरप्रूफिंग के लिए यह जरूरी कच्चा माल है। अब जब स्टॉक घटने लगा है तो लागत तेजी से बढ़ रही है, छोटे कारोबारी सबसे ज्यादा दबाव में हैं।

पेट्रोलियम महंगा, उत्पादन और मुश्किल

सीआईआई यूपी चैप्टर की चेयरपर्सन डॉ. उपासना अरोड़ा के अनुसार, भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधा विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है। परिवहन महंगा हुआ है, उत्पादन लागत ऊपर जा रही है, लेकिन बाजार में मांग उतनी नहीं बढ़ी। यही असंतुलन एमएसएमई क्षेत्र के मुनाफे को खा रहा है।

निवेशकों में हिचक, बाजार में अनिश्चितता

आईआईए के सदस्य मोहम्मद सउद कहते हैं कि उद्योग कोरोना के लंबे असर से धीरे-धीरे संभल रहे थे। ऐसे समय में यह नया संकट आ गया। निवेशकों का भरोसा डगमगाया है, और रुपये में उतार-चढ़ाव से आयात पर निर्भर कारोबारियों की योजना गड़बड़ा रही है। वित्तीय गणित बार-बार बदल रहा है। कच्चा माल कब और कितने दाम पर मिलेगा, कोई स्पष्टता नहीं है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि मध्य पूर्व में तनाव कब थमता है। क्योंकि अगर जंग लंबी खिंची, तो उसका असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक नहीं रहेगा, बल्कि यूपी की फैक्ट्रियों के बंद दरवाजों तक दिखाई देगा।

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