भोपाल में ‘इंडिया से भारत’ पुस्तक विमोचन में CM मोहन यादव ने भारत के स्वर्णिम दौर की बात कही, जानिए क्या बोले लेखक और हेमंत शर्मा।
भोपाल में ‘इंडिया से भारत: एक प्रवास’ पुस्तक का विमोचन समारोह एक बड़े वैचारिक आयोजन के रूप में सामने आया। दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में राजनीति, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का केंद्र रहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन, जिसमें उन्होंने बदलते भारत की तस्वीर पर विस्तार से बात रखी।
‘यह भारत के स्वर्णिम दौर की झलक’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश तेजी से “इंडिया” से “भारत” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में जो बदलाव दिख रहे हैं, वे सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक जागरण का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “राम मंदिर से लेकर वंदे मातरम तक, आज हर प्रतीक के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ा है।”
सीएम ने मध्यप्रदेश की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सक्रिय है। वैदिक घड़ी और ऐतिहासिक धरोहरों के पुनर्जीवन को उन्होंने इसी दिशा का प्रयास बताया।
उन्होंने आगे कहा कि 2014 के बाद से लेकर अब तक की यात्रा भारत के आत्मविश्वास को दिखाती है। हाल के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “स्वर्णिम काल” की झलक बताया।
‘भारत अब मजबूती से जवाब दे रहा है’
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि आज का भारत पहले जैसा नहीं रहा। “हम अपने दुश्मनों को जवाब देने में सक्षम हैं,” उन्होंने कहा।
इस दौरान उन्होंने विंग कमांडर अभिनंदन के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नया भारत का आत्मविश्वास दर्शाता है।
सीएम ने यह भी कहा कि आज देश वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रख रहा है और यह बदलाव वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
लेखक ने बताया- क्यों जरूरी है यह किताब
पुस्तक के लेखक प्रशांत पॉल ने कहा कि यह किताब भारत की बदलती सोच को समझाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत अपनी मूल पहचान से दूर रहा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की स्थिति भी उतनी मजबूत नहीं थी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे पहले भारत को कई मंचों पर उपेक्षा का सामना करना पड़ा, जबकि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जिसका असर दुनिया में भी दिख रहा है।
हेमंत शर्मा बोले- नई पीढ़ी को समझना होगा भारत
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि नई पीढ़ी को भारत के इतिहास और उसकी असली पहचान को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि “सिर्फ डिजिटल माध्यम ही नहीं, किताबों से भी जुड़ना होगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की विरासत और विकास अब साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं, और यही नए भारत की असली तस्वीर है।
‘स्व-बोध’ की यात्रा को समझाती है किताब
प्रज्ञा प्रवाह के सह संयोजक दीपक शर्मा ने कहा कि यह किताब भारत के “स्व-बोध” की यात्रा को समझने का प्रयास है।
उन्होंने बताया कि 1947 के बाद भी भारत लंबे समय तक “इंडिया सोच” में उलझा रहा, जबकि अन्य देशों ने अपनी पहचान के साथ तेजी से विकास किया।
कार्यक्रम में दिखा व्यापक सहभाग
कार्यक्रम का आयोजन प्रज्ञा प्रवाह द्वारा किया गया।
इस दौरान संगठन का परिचय वीडियो भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में रवीन्द्र कान्हेरे, धीरेंद्र चतुर्वेदी सहित कई शिक्षाविद, कुलगुरु, प्रोफेसर और समाजसेवी मौजूद रहे।
यह आयोजन सिर्फ पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि “भारत” की अवधारणा पर व्यापक चर्चा का मंच बनकर उभरा।