Breaking News
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश

दुश्‍मन की सैटेलाइट्स पर भी होगी पैनी नजर, अब अंतरिक्ष में भी भारत का जासूस

दुश्‍मन की सैटेलाइट्स पर भी होगी पैनी नजर, अब अंतरिक्ष में भी भारत का जासूस

भारत ने कक्षा में जासूसी की स्वदेशी क्षमता हासिल की, निजी कंपनी अज़ीस्ता ने अंतरिक्ष में दूसरे उपग्रह की इमेजिंग कर रचा इतिहास

दुश्‍मन की सैटेलाइट्स पर भी होगी पैनी नजर अब अंतरिक्ष में भी भारत का जासूस

भारत ने अंतरिक्ष के एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में चुपचाप बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। अब सिर्फ ज़मीन या आसमान ही नहीं, बल्कि कक्षा में मौजूद दूसरे उपग्रहों पर भी भारत नज़र रख सकता है। इसे आसान भाषा में कहें तो, भारत ने “कक्षा में जासूसी” करने की स्वदेशी क्षमता दिखा दी है। यह काम किया है अहमदाबाद की निजी कंपनी अज़ीस्ता इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने, जिसने अपने 80 किलोग्राम वजनी पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह AFR के ज़रिए अंतरिक्ष में मौजूद एक अन्य वस्तु की इमेजिंग कर दिखाई। किसी भारतीय निजी कंपनी द्वारा ऐसा पहली बार किया गया है।


ISS की तस्वीरें, लेकिन संदेश बहुत बड़ा

3 फरवरी को अज़ीस्ता ने दो सुनियोजित प्रयोगों में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की सफल तस्वीरें लीं। ISS कोई छोटा लक्ष्य नहीं है, यह निम्न-पृथ्वी कक्षा में सबसे बड़ा और आसानी से पहचाने जाने वाला पिंड है, लेकिन इसे ट्रैक करना और साफ इमेज लेना फिर भी आसान काम नहीं। पहला इमेजिंग प्रयास लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से किया गया, दूसरा करीब 245 किलोमीटर से। दोनों ही मामलों में AFR के सेंसर को बेहद तेज़ी से चल रहे ISS को सटीकता से ट्रैक करना था। नतीजा, कुल 15 अलग-अलग फ्रेम कैप्चर हुए, लगभग 2.2 मीटर की इमेजिंग सैंपलिंग के साथ। कंपनी का दावा है कि दोनों प्रयोग 100 प्रतिशत सफल रहे।

कठिन हालात में भी सटीक ट्रैकिंग

खास बात यह रही कि ये प्रयोग चुनौतीपूर्ण रोशनी और निकट-क्षितिज परिस्थितियों में किए गए। इसके बावजूद AFR ने ISS को लगातार फोकस में रखा। इससे अज़ीस्ता के ट्रैकिंग एल्गोरिदम और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम की सटीकता साबित होती है।


सिर्फ तकनीक नहीं, रणनीतिक संकेत

अज़ीस्ता के प्रबंध निदेशक श्रीनिवास रेड्डी कहते हैं कि यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है। यह इस बात का सबूत है कि भारत में पूरी तरह स्वदेशी एल्गोरिदम, सेंसर और सैटेलाइट इंजीनियरिंग का उपयोग कर कक्षा में मौजूद वस्तुओं की पहचान और निगरानी की जा सकती है। उनके मुताबिक यही तकनीक आगे चलकर नॉन-अर्थ इमेजिंग (NEI) और स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) पेलोड की रीढ़ बनेगी। भविष्य में इससे आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी तक संभव हो सकती है।


क्यों ज़रूरी है स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस

आज अंतरिक्ष सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों का क्षेत्र नहीं रह गया है। दुनिया भर के देश ऐसे उपग्रह तैनात कर रहे हैं जो दूसरे उपग्रहों के पास से गुजर सकते हैं, उन्हें जाम कर सकते हैं या हस्तक्षेप कर सकते हैं। ऐसे में अंतरिक्ष में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी उतनी ही अहम हो गई है जितनी ज़मीन पर होने वाली गतिविधियों की।

भारत फिलहाल संचार, नौवहन, पृथ्वी अवलोकन और रणनीतिक उपयोगों के लिए 50 से अधिक उपग्रह संचालित करता है, जिनकी कुल कीमत 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जाती है। इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए कक्षा में मौजूद अन्य उपग्रहों की गतिविधियों पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी है, खासकर तब जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ हो।


इसरो के बाद अब निजी क्षेत्र की एंट्री

इसरो पहले भी इस तरह की क्षमताएं दिखा चुका है, हाल ही में SPADEX जैसे इन-ऑर्बिट प्रयोग इसका उदाहरण हैं। लेकिन अज़ीस्ता का यह प्रयास इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है। ISS की इमेजिंग करके AFR ने एक बुनियादी क्षमता साबित की है, जिसे आगे चलकर कम सहयोग करने वाले या ज्यादा जटिल कक्षीय लक्ष्यों पर लागू किया जा सकता है। 

अज़ीस्ता के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर आदर्श भारद्वाज कहते हैं कि यह प्रदर्शन भविष्य में हासिल की जा सकने वाली क्षमताओं का पहला प्रमाण है। उनके अनुसार, भारत अब अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।


AFR: छोटा उपग्रह, बड़ी भूमिका

AFR अपने आप में एक मील का पत्थर है। सिर्फ 80 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह भारत में निजी उद्योग द्वारा पूरी तरह डिजाइन, निर्मित और संचालित किया गया पहला सैटेलाइट है। 13 जून 2023 को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से इसे लॉन्च किया गया था। यह उपग्रह अब कक्षा में 2.5 साल पूरे कर चुका है और सामान्य रूप से काम कर रहा है। इसके मिशन का शेष समय भी करीब 2.5 वर्ष है। SSA के अलावा AFR नौसेना इमेजिंग, नाइट इमेजिंग और वीडियो इमेजिंग मोड को भी सपोर्ट करता है। अज़ीस्ता का दावा है कि वह अब अगली पीढ़ी के ऐसे स्वदेशी पेलोड विकसित कर रहा है, जो ISS की 25 सेंटीमीटर तक के रिज़ॉल्यूशन में इमेजिंग कर सकेंगे।