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समोसा खाया तो साढ़े तीन किलोमीटर चलना होगा, वरना बीमारी तय: डॉ. दीक्षित

समोसा खाया तो साढ़े तीन किलोमीटर चलना होगा, वरना बीमारी तय: डॉ. दीक्षित

समोसा खाया तो साढ़े तीन किलोमीटर चलना होगा वरना बीमारी तय डॉ दीक्षित

आज की जीवनशैली किस तरह धीरे-धीरे समाज को बीमार बना रही है, इसे डॉ. दीक्षित ने बेहद सीधे और चौंकाने वाले उदाहरणों के साथ समझाया। उनका साफ कहना है कि शक्कर और जंक फूड की आदतें आने वाली पीढ़ी को रोगों की गिरफ्त में धकेल रही हैं, और इससे बाहर निकलने का रास्ता दवाइयों में नहीं, अनुशासित जीवनशैली में है।

दवा आसान, जीवनशैली कठिन

डॉ. दीक्षित ने कहा कि मधुमेह होने पर लोगों को सुबह-शाम एक गोली लेना बहुत आसान लगता है, लेकिन रोज टहलना, व्यायाम करना और खाने में संयम रखना कठिन लगता है। शुरुआत में एक गोली से शुगर कंट्रोल रहती है, फिर दो गोलियों की जरूरत पड़ती है और धीरे-धीरे इंसुलिन पर निर्भरता बढ़ जाती है. यहीं से समस्याओं की असली शुरुआत होती है। इसके बाद गुर्दे, आंखों और नसों से जुड़ी जटिलताएं सामने आने लगती हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर शुरुआत में ही जीवनशैली बदली जाए, तो इन गंभीर हालात से बचा जा सकता है।

बार-बार खाने से इंसुलिन पर लगातार दबाव

डॉ. दीक्षित के मुताबिक भोजन की असीम उपलब्धता ने इंसान को बार-बार खाने का आदी बना दिया है। इससे शरीर में इंसुलिन का लगातार स्राव होता रहता है, जो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ा देता है. उनका कहना था कि कम बार, संतुलित और नियंत्रित भोजन से इंसुलिन संतुलन में रहता है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “अगर समोसा खाना है तो कम से कम साढ़े तीन किलोमीटर चलने की तैयारी भी रखनी होगी।”

युवाओं में अचानक मौत, उपेक्षा भी जिम्मेदार

डॉ. दीक्षित ने युवाओं में बढ़ती अचानक हृदयाघात से होने वाली मौतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई मामलों में कारण जन्मजात विकार होते हैं, जिनकी समय रहते जांच नहीं कराई जाती.उनका कहना था कि 13-14 साल की उम्र में बच्चों की हृदय और मस्तिष्क संबंधी जांच बेहद जरूरी है। भीतर छिपी कमजोरी कभी-कभी बिना चेतावनी के जान ले लेती है।

बच्चों के खानपान पर भी दी सलाह

डॉ. दीक्षित ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को चॉकलेट और जंक फूड की जगह बादाम, अखरोट और प्रोटीनयुक्त आहार दिया जाए। यही आदतें आगे चलकर उन्हें मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों से बचा सकती हैं. इस पूरे विचार-विमर्श ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हम दवा पर निर्भर रहेंगे या समय रहते अपनी जीवनशैली सुधारेंगे।

सानंद में विशेष व्याख्यान

आयोजक: सानंद न्यास एवं चोइथराम चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र

दिनांक: 1 फरवरी 2026 (रविवार)

समय: सायं 5 बजे

स्थान: जाल सभागार, साउथ तुकोगंज

विषय: दीक्षित जीवनशैली के माध्यम से वजन घटाना और मधुमेह से मुक्ति

मुख्य अतिथि: सुमित नांदेडकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, चोइथराम चैरिटेबल ट्रस्ट