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उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या मेला

उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या पर लगा ‘भूतों का मेला’, शिप्रा नदी के तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या पर शिप्रा नदी के तट पर ‘भूतों का मेला’ लगा, श्रद्धालुओं ने विषेश अनुष्ठान किए। इस दिन शिप्रा नदी में स्नान करने की परंपरा। जानें इसमें शामिल होने क्यों आते हैं लोग?


उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या पर लगा ‘भूतों का मेला’ शिप्रा नदी के तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में भूतड़ी अमावस्या के अवसर पर शिप्रा नदी के तट पर पारंपरिक ‘भूतों का मेला’ आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और आस्था के साथ विशेष अनुष्ठान किए।

शिप्रा नदी में स्नान का विशेष महत्व

भूतड़ी अमावस्या पर शिप्रा नदी में स्नान करने की परंपरा है। लोकिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र स्नान और तर्पण करने से पितरों की शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। रामघाट, सिद्धवट और बावन कुंड जैसे स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।

‘भूतों का मेला’ क्यों कहा जाता है

चैत्र अमावस्या पर आयोजित मेले को स्थानीय तौर पर ‘भूतों का मेला’ कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन लोग प्रेत बाधा या मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं। कई श्रद्धालु बावन कुंड में स्नान के साथ विशेष पूजा और तंत्र क्रियाएं करते नजर आए। कुछ लोग अपने ऊपर आई कथित बाधाओं को दूर करने के लिए अनुष्ठान करवाते हैं।

तांत्रिक अनुष्ठानों का भी आयोजन

मेले के दौरान कुछ स्थानों पर तांत्रिक क्रियाएं और विशेष पूजा-पाठ भी किए गए। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और हर साल चैत्र अमावस्या पर आयोजित होती है। पंडित धीरज के अनुसार, इस दिन को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां लोग आत्मिक शांति और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भूतड़ी अमावस्या के मौके पर उज्जैन में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का अनूठा संगम माना जाता है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात रहीं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। 

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