होली पर भोपाल और रानी कमलापति स्टेशनों से चलने वाली ट्रेनों में भारी भीड़। आरक्षित कोचों में सामान्य यात्री घुसे, कन्फर्म टिकट धारक परेशान।
होली के मौके पर रेलवे का भीड़ प्रबंधन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भोपाल और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में हालात ऐसे हैं कि स्लीपर और एसी जैसे आरक्षित कोचों में भी सामान्य यात्री घुस गए हैं। नतीजा यह कि कन्फर्म टिकट लेकर सफर करने वाले यात्री परेशान हैं, जबकि प्लेटफॉर्म पर मौजूद पुलिसकर्मी और रेलवे अधिकारी भी बेबस नजर आ रहे हैं।दरअसल, समस्या की जड़ लंबी दूरी की ट्रेनों में जनरल कोचों की कमी बताई जा रही है। होली पर घर लौटने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई, लेकिन उसी अनुपात में व्यवस्थाएं नहीं की जा सकीं।
भोपाल मंडल के बड़े स्टेशन, फिर भी अव्यवस्था
भोपाल मंडल के सबसे अधिक यात्री दबाव वाले स्टेशन बीना, भोपाल, रानी कमलापति, इटारसी और गुना हैं। इन स्टेशनों से होली के दौरान रोजाना औसतन 15 से 20 हजार यात्री सफर कर रहे हैं. सबसे ज्यादा दबाव भोपाल और रानी कमलापति स्टेशन पर है, जहां से रोजाना और साप्ताहिक मिलाकर करीब दो दर्जन ट्रेनें संचालित होती हैं। इसके बावजूद भीड़ को संभालने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
आरक्षित कोचों में भी नहीं बची जगह
भोपाल से जोधपुर, जयपुर, रीवा, रायपुर समेत एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनों में स्लीपर और एसी कोचों के हालात खराब हैं। सामान्य यात्री आरक्षित डिब्बों में घुसकर बैठ गए हैं, जिससे कन्फर्म टिकट धारकों को न सीट मिल पा रही है, न ही सुरक्षित माहौल। कई यात्री तो अपने सामान के साथ खड़े होकर सफर करने को मजबूर हैं।
इन राज्यों की ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़
भोपाल से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार जाने वाली प्रमुख ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं है। त्योहार के समय परिवार के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों को खास दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से अतिरिक्त कोच या विशेष ट्रेनों की व्यवस्था जमीन पर असरदार नजर नहीं आ रही।
यात्रियों की आपबीती
हावड़ा जाने वाली क्षिप्रा एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-4 में सफर कर रहे यात्री विमलेश ने बताया कि जब वे संत हिरदाराम नगर स्टेशन से ट्रेन में चढ़े, तो उनकी निर्धारित सीट पर पहले से छह लोग बैठे हुए थे। टिकट दिखाने के बाद भी कोई उठने को तैयार नहीं था। ऐसी शिकायतें अन्य ट्रेनों से भी लगातार सामने आ रही हैं।यात्रियों का कहना है कि त्योहार के समय रेलवे को पहले से ही भीड़ का अनुमान होता है, इसके बावजूद अगर आरक्षित कोचों में भी अव्यवस्था रहे, तो यह सीधा प्रबंधन की नाकामी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में रेलवे इस स्थिति से कैसे निपटता है या यात्रियों की परेशानी यूं ही जारी रहती है।