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हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह 2026: नर्मदाप्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को मिला हिन्दी गौरव अलंकरण

पाँच कवियों को भी काव्य गौरव अलंकरण मिला, प्रो. सिंघई ने कहा हिन्दी के साथ-साथ देवनागरी का साथ ज़रूरी है, डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि भाषा और भारतीयता की चिंता आवश्यक है।


हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह 2026 नर्मदाप्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को मिला हिन्दी गौरव अलंकरण

इंदौर। हिन्दी के समवेत स्वर के रूप में कार्यरत ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा रविवार को प्रेस क्लब में हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें वर्ष 2026 का हिन्दी गौरव अलंकरण वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय व अतुल तारे को विभूषित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे व अध्यक्षता देअ विवि के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने की, साथ ही, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी विशेष अतिथि रहे।

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हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह में काव्य साधकों में नागदा से कमलेश दवे, माण्डव से डॉ. पंकज प्रसून चौधरी, उज्जैन से निशा पण्डित, बड़नगर से पुष्पेंद्र जोशी पुष्प और भोपाल से शिवांगी प्रेरणा को काव्य गौरव अलंकरण प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि कोकजे ने कहा कि ’प्राथमिक पढ़ाई मातृभाषाओं में होगी, तब ही प्रगति सम्भव होगी। इच्छाशक्ति के बलवान होने से भाषाओं का विस्तार होगा।’ कुलगुरु प्रो. सिंघई ने कहा कि

भविष्य की चिंताओं के बीच भी हिन्दी ज़िंदा रहेगी। और हिन्दी के साथ-साथ देवनागरी का साथ चाहिए।

डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि ‘भाषा और भारतीयता की चिंता आवश्यक है, इसी बीच भारत में हिन्दी विरोध के साथ-साथ अन्य बोलियों के बीच भाषाओं के प्रति पाखण्ड पर्व बन्द होना चाहिए।’ सम्मान मूर्ति नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि ‘लोक से हिन्दी समृद्ध है, इसी बीच साहित्य और कला के अंतरसंबंध मज़बूत होंगे और इनके बीच आज अन्तरानुशासन की आवश्यकता है।’

आभासी दुनिया में स्व का बोध है भाषा प्रेम- अतुल तारे

सम्मान मूर्ति अतुल तारे ने कहा कि

हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में समाचार पत्रों की अहम भूमिका रही है। आभासी दुनिया यानी एआई का युग है, इसमें अपनी भाषा से जुड़ाव स्व का बोध करवाता है।

आयोजन में साहित्यकार संध्या राणे के कविता संग्रह ‘शुभम् करोति’ का लोकार्पण भी हुआ। अतिथियों का स्वागत नितेश गुप्ता, डॉ. नीना जोशी, पारस बिरला, राजेश यादव, विलास राणे, मणिमाला शर्मा, प्रदीप जोशी, संजय त्रिपाठी व श्याम कामले ने किया। स्वागत उद्बोधन डॉ. अर्पण जैन ’अविचल’ एवं संचालन डॉ. अखिलेश राव ने किया। अभिनन्दन पत्र वाचन आशीष पँवार व चेतन जोशी ने किया।

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