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Hardoi POCSO Court Verdict

Hardoi POCSO Court: पॉक्सो कोर्ट का निर्णय, नाबालिग से दुष्कर्म में 20 साल जेल, अपहरण आरोप से बरी

कछौना क्षेत्र में वर्ष 2022 में नाबालिग को ले जाकर दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी दिनेश पुत्र सोनेलाल निवासी सदुपुर को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये...


hardoi pocso court पॉक्सो कोर्ट का निर्णय नाबालिग से दुष्कर्म में 20 साल जेल अपहरण  आरोप से बरी

Hardoi POCSO Court: पॉक्सो कोर्ट का निर्णय, नाबालिग से दुष्कर्म में 20 साल जेल, अपहरण आरोप से बरी |

बृजेश कबीर, हरदोई: कछौना क्षेत्र में वर्ष 2022 में नाबालिग को ले जाकर दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी दिनेश पुत्र सोनेलाल निवासी सदुपुर को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है, जिसे न भरने पर तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363 और 366 के आरोपों से बरी कर दिया। फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिनेश गौर (न्यायालय संख्या-14/पॉक्सो अधिनियम) ने सुनाया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) मनीष श्रीवास्तव ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एसपी सिंह ने आरोपी का पक्ष रखा।

स्कूल रिकॉर्ड से तय हुई नाबालिग की उम्र, मेडिकल खारिज

मामले में पीड़िता की उम्र को लेकर बचाव पक्ष ने सवाल उठाया था। अदालत ने विद्यालय के मूल एसआर रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि 18 जून 2007 को विश्वसनीय माना। घटना 10 जून 2022 की थी। इस आधार पर अदालत ने घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 11 माह 29 दिन निर्धारित की। रेडियोलॉजिकल जांच में उम्र करीब 17 वर्ष बताई गई थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया, जब जन्मतिथि के संबंध में विश्वसनीय शैक्षिक अभिलेख उपलब्ध हों तो चिकित्सा से निकला अनुमान उस पर वरीय नहीं हो सकता।

धारा 164 के बयान में अलग तस्वीर, अदालत में बदला बयान

मामले में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण रही। उसने अदालत में आरोपी के साथ जाने और कोथावां में उसके रिश्तेदार के घर चार दिन रहने के दौरान दो बार शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात कही। हालांकि, मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में उसने आरोपी के साथ जाने और शारीरिक संबंध बनने की बात कही थी, लेकिन जबरन यौन संबंध या बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप नहीं लगाया था। पीड़िता ने अदालत में कहा, मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया बयान दबाव और धमकी के कारण था।

अपहरण के आरोप में नहीं मिली दोषसिद्धि

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद माना, पीड़िता स्वयं आरोपी से मिलने के लिए घर से निकली थी। उसके आरोपी के साथ जाने में आरोपी की ओर से ऐसा स्पष्ट प्रलोभन या सक्रिय भूमिका साबित नहीं हुई, जिसे आईपीसी की धारा 363 और 366 के तहत अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने के लिए आवश्यक माना जाए। इस आधार पर आरोपी को इन दोनों धाराओं में बरी कर दिया गया।

नाबालिग होने से सहमति का नहीं रहा महत्व

दुष्कर्म के आरोप पर अदालत ने कहा, घटना के समय पीड़िता 18 वर्ष से कम आयु की थी। इसलिए आरोपी के साथ संबंध उसकी सहमति से बने हों, तब भी कानून के तहत वह सहमति आरोपी को अपराध से मुक्त नहीं करती। पीड़िता की गवाही, उम्र संबंधी अभिलेख और उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्यों पर विचार करते हुए अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(3) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत दोषी माना।

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