ग्वालियर केंद्रीय जेल में दिव्यांग बंदियों के लिए हर महीने परीक्षण शिविर लगाए जाएंगे। यूडीआईडी कार्ड बनाने और जेल को सुगम्य बनाने के निर्देश दिए गए।
ग्वालियर: मध्यप्रदेश के ग्वालियर केंद्रीय जेल में बंद दिव्यांग कैदियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने जेल का निरीक्षण कर कई अहम निर्देश दिए।
यूडीआईडी कार्ड बनाने पर जोर
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में दिव्यांग बंदियों के पास अभी तक यूडीआईडी (Unique Disability ID) कार्ड नहीं हैं। आयुक्त ने जेल प्रशासन और जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को निर्देश दिए कि सभी पात्र बंदियों के यूडीआईडी कार्ड जल्द से जल्द बनाए जाएं, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
हर महीने लगेगा दिव्यांग परीक्षण कैम्प
जेल परिसर में आयोजित दिव्यांग परीक्षण शिविर के दौरान आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अब हर महीने नियमित रूप से ऐसे शिविर लगाए जाएंगे। इसके लिए जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की टीम को जेल प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जेल अधीक्षक विदित सिरवेया के अनुसार, वर्तमान में जेल में 5 महिला बंदियों सहित कुल 132 दिव्यांग कैदी हैं। इनके लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
जेल को बनाया जाएगा ‘सुगम्य’
आयुक्त डॉ. खेमरिया ने बताया कि राज्यपाल मंगू भाई पटेल के निर्देश पर प्रदेश की जेलों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाया जा रहा है। इसी क्रम में ग्वालियर केंद्रीय जेल में रैम्प, सुगम टॉयलेट और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने जेल की बैरकों, अस्पताल, टॉयलेट ब्लॉक और भोजनशाला का दौरा किया। उन्होंने सुगम्यता के मानकों के अनुसार आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के आशीष शर्मा ने बंदियों को उनके अधिकारों और योजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों का कहना है कि इन प्रयासों से न केवल सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि दिव्यांग बंदियों के पुनर्वास में भी मदद मिलेगी।